वर्ल्ड साइट-डे की थीम ‘लव योर आइज।’
भोपाल : पर्यावरण संस्कृति संरक्षण एवं मानव कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने संध्या स्टडी सर्किल पर बच्चों को बताया कि इस वर्ष 9 अक्टूबर 2025 को मनाए जाने वाले वर्ल्ड साइट-डे की थीम है ‘लव योर आइज’ है। नेत्र रोगों के प्रति सतर्कता और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।नेत्र मानव शरीर का सबसे महत्त्वपूर्ण अंग है। जन्म के बाद 80 प्रतिशत ज्ञान, जो हम प्राप्त करते हैं वह हमारी आंखों (दृष्टि) से होता है। बच्चों को बताया कि चाणक्य द्वारा लिखित नीति सत्कर्म के अंत में कहा गया है- ‘सर्वेन्द्रियं नयनं प्रधानम्’ जिसका शाब्दिक अर्थ है, सभी इंद्रियों में, दृष्टि की भावना सर्वोच्च है। बढ़ते स्क्रीन टाइम के कारण हर चौथे बच्चे को आंख में हो रही परेशानी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्वभर में हर 5 सेकंड में एक व्यक्ति दृष्टिहीन हो जाता है। आज स्मार्टफोन सबकी जरूरत बन गया है, लेकिन इसका सबसे बुरा असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। घंटों तक मोबाइल स्क्रीन पर चिपके रहने की आदत अब बच्चों की आंखों के लिए खतरनाक साबित हो रही है। कैम्प रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ते स्क्रीन टाइम से बच्चों की आंखों में डिजिटल इफेक्ट हो रहा है। मोबाइल के उपयोग से हर चौथे बच्चे की आंख में परेशानी हो रही है।
भारत में आज भी नेत्र रोगों के प्रति आज भी सजगता एवं सतर्कता नहीं है और यही कारण है कि नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार विश्वभर में अंधता के क्षेत्र में भारत का स्थान तीसरे पायदान पर है।
भारत में लगभग 2 लाख बच्चे अंधत्व से पीड़ित है एवं प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार नए ऐसे बच्चे जन्म लेते है जो कि जन्म से देख नहीं सकते है। विश्व दृष्टि दिवस का उद्देश्य है आंखों के रोगों को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाना एवं सशक्त प्रयासों के माध्यम से दृष्टिहीनता को रोकने की दिशा में ठोस कदम उठाते हुए विश्वभर से उपचार योग्य अंधता का उन्मूलन करना है।
नेत्र बीमारियों के समय पर उपचार के माध्यम से एवं समाज में जागरूकता बढ़ाकर से विश्वभर में होने वाली 80 प्रतिशत अंधता को रोका जा सकता है।
भारत में अंधता/दृष्टि विहीनता के पांच प्रमुख कारण – मोतियाबिंद (कैटरेक्ट), कालापानी (ग्लूकोमा), रेटिना (पर्दे की बीमारियां) , दृष्टि दोष (रिफ्रेक्टिव एरर), कॉर्निया(पारदर्शी पुतली) की बीमारियां हैं।
भारत में प्रतिवर्ष लगभग 38 लाख व्यक्ति मोतियाबिंद होने के कारण दृष्टि बाधित हो जाते है। हमारे देश में कुल अंधता का लगभग 1 प्रतिशत आंखों की पारदर्शी पुतली के सफेद हो जाने (कॉर्नियल ब्लाइंडनेस) के कारण है। आइए विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर हम सभी मिलकर सामूहिक प्रयासों से उपचार योग्य अंधता के उन्मूलन का संकल्प लें।
वर्ल्ड साइट-डे की थीम ‘लव योर आइज’ के अनुसार आइए हम बच्चों को डिजिटल डिटॉक्स का अभ्यास सप्ताह में एक दिन करने के लिए प्रेरित करें। सप्ताह में एक दिन कुछ घंटे प्रकृति के सानिध्य में बिताएं। अपनी आंखों से प्रेम करें एवं सभी मिलकर विश्वभर से उपचार योग्य अंधता के उन्मूलन के लिए साझा प्रयास करें। विश्वभर से उपचार योग्य अंधता के उन्मूलन के लिए हम सभी को मिलकर जनसामान्य को नेत्रों की सुरक्षा के प्रति सचेत करना होगा एवं नेत्र रोगों के निदान और उपचार के लिए सुविधाएं देश के छोटे गांवों मेें भी उपलब्ध करवानी होगी।
आंखों की समस्याओं के सबसे बड़े कारण
▶ डिजिटल स्क्रीन टाइमः लगातार मोबाइल, टीवी और लैपटॉप देखना।
▶ आउटडोर एक्टिविटी की कमीः धूप और प्राकृतिक रोशनी से दूरी। बच्चे मोबाइल के कारण घर से बाहर नहीं निकलते।
▶ गलत पोजिशन और रोशनी में पढ़ाई: कम रोशनी या लेटकर पढ़ना।
▶ डाइट की कमीः हरी सब्जियों, विटामिन-ए और पोषक तत्वों की कमी।
आंखों की सुरक्षा के लिए यह सावधानियां जरूरी
▶ हर 20 मिनट पर स्क्रीन से ब्रेक जरूरी।
▶ हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड देखें।
▶ रोज कम से कम 1 घंटे आउटडोर खेलकूद जरूरी।
▶ संतुलित आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, दूध और फल शामिल करें।
▶ आंखों में जलन या धुंधलापन हो तो तुरंत जांच कराएं।
कार्यशाला के उपरांत पर्यावरण संस्कृति संरक्षण अध्यक्ष सुशील कुमार जैन द्वारा बच्चों को नेत्रदान के महत्व की जानकारी भी विस्तार से दी एवं नेत्रदान करने हेतु समाज को अभिप्रेरित करने की प्रेरणा भी दी।

