छोटा मिर्जापुर मे पहले कमीशन बाद में सरकारी योजनाओं का लाभ

सरकार क़ो बदनाम क्या ऐसे प्रधानों व सचिवों कि जरूरत हैँ

20,000 न देना बनाता है अपात्र,मन मसोस कर रह जा रहे बेघर

(राहुल गुप्ता)नरायनपुर,मिर्जापुर।उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समय समय पर गत वर्षों से अबतक निम्न प्रकार के योजनाए लागू कर रखा है।प्रधानमंत्री आवास, शौचालय जैसी योजनाएं चल रही है। इसके बावजूद भी आज तक पात्र लोगों को आवास नहीं प्राप्त हुआ। कोई आवास हेतू तो कोई शौचालय हेतु गत प्रधानी से ही आज तक कोई प्रधान के यहा तो कोई संबंधित के यहा चक्कर लगाते लगाते पैर के चप्पल की समाधि हो गयी पर आज भी हम विंग अपने हक से है।
जनप्रतिनिधि हो या विभाग के बाबु सब आश्वाशन दिया यही देते है कि इती बार फार्म भरा हम करा देगें अगर किसी कारण हमें योजना अंतर्गत आते भी है तो प्रधान कहते है तु हमे वोट नही दिए है यह शब्द कहते हुए अपने हितैषी को अवैधानिक से उपलब्ध लाभ करवा देते है और हम पात्र का नाम जानबूझकर कटवा देते है। हाल ही मे प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत साल 2015 में हुई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य हर घर को छत देना था।

छोटा मिर्जापुर गांव में गरीब परिवार झुग्गी-झोपड़ी में रहने को मजबूर

बताते चले कि विकास खंड जमालपुर अंतर्गत लगभग आधे दर्जन गाव का यही हालत है। उदाहरण स्वरूप नरायनपुर बाजार के पास स्थित एक गांव छोटा मिर्जापुर कि बात करें आज भी यहा गरीब परिवार झुग्गी-झोपड़ी और कच्चे टूटे-फूटे घरों में रहते हैं वह अपना खुद का आवास बना सकें। योजना का लक्ष्य था कि साल 2022 तक सभी को उनके आवास मिल जाएंगे।लेकिन अगर ग्रामीण क्षेत्रों की बात की जाये तो सभी को कागज़ी रिकार्ड्स में घर मिल गए हैं। वहीं अगर हम आपको आंखों देखा हाल बताए तो ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली अधिकतर आबादी इस समय कच्ची झुग्गी-झोपड़ियों और पन्नी के घरों रह रही है। ऐसा नहीं है कि यह लोग पात्र नहीं है लेकिन आवास ना होने के कारण पन्नी डालकर रहना उनकी मज़बूरी है।

प्रधान से लेकर नेता आते हैं वोट मांगने, विकास जीरो

पात्र पिड़ितों का कहना है कि हमलोग पिछले कई पंचवर्षीय चुनाव बीत गए लेकिन अभी तक उनके गाँव में विकास का नामोनिशान नहीं है। जब जब चुनाव होता है तब प्रधान से लेकर नेता वोट मांगने तो आते हैं लेकिन जब इन लोगों के विकास की बारी आती है तब इन ग्रामीणों की कोई नहीं सुनता।

पिड़ितों का आरोप है कि 10 साल से आवास की मांग लगातार कर रहे हैं पर हमको आवास आज तक नहीं दिया गया है। इसका कारण है 20, 000 रुपये न देना। लोगों का आरोप है की अगर सचिव, प्रधान मित्र को 20,000 रुपये नहीं तो उनके आवास काट दिए जाते हैं। जिनके पास 50 बीघे जमीन अच्छीखासी मकान और वाहन बोरिंग आदि है फिर भी उंन व्यक्तियों को आवास दिया जाता है।पिड़ितों का कहना है कि इतबार हमलोग वोट नही देगें हमलोग को पहले सरकार द्वारा योजना का पहले प्राप्त सभी को लाभ चाहिए तब हमलोग वोट देगें योगी। उक्त बातों कि चर्चा बाजार आदि स्थानों पर जोरो से है।

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