(ज्ञानेश दुबे)वाराणसी। धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष व सांसद राहुल गांधी का 56वां जन्मदिन बेहद अनोखे और चर्चा का विषय बने अंदाज में मनाया गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में चित्रित कर उनका दुग्धाभिषेक किया। इस आयोजन के साथ ही सियासी जानकारों ने 2027 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस की बदली हुई रणनीति और ‘ब्राह्मण कार्ड’ की संभावनाओं पर चर्चा शुरू कर दी है।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य आयोजन
वाराणसी में युवा कांग्रेस द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में ब्राह्मणों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरी विधि-विधान से राहुल गांधी का जन्मदिन मनाया। कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी की एक बड़ी तस्वीर को भगवान परशुराम के रूप में दर्शाया गया, जिसमें उनके एक हाथ में फरसा और दूसरे हाथ में संविधान था। गंगा तट पर स्थित इस कार्यक्रम में कांग्रेसी नेताओं ने दूध से अभिषेक कर उनके दीर्घायु होने की कामना की।
2027 की सियासी बिसात और ‘ब्राह्मण चेहरा’
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राहुल गांधी को भगवान परशुराम के स्वरूप में प्रस्तुत करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस का यह कदम ब्राह्मण वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। समाजवादी पार्टी के बाद अब कांग्रेस भी इसी राह पर चलते हुए ब्राह्मण समाज के बीच अपनी पैठ मजबूत करने की कवायद में जुटी है।
क्या बोले युवा कांग्रेस के पदाधिकारी?
युवा कांग्रेस के वाराणसी जिला अध्यक्ष अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा, “हमने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का जन्मदिन मां गंगा की गोद में पूरी श्रद्धा के साथ मनाया है। हमने बाबा विश्वनाथ और मां गंगा से उनके उत्तम स्वास्थ्य और देश के भविष्य में उनके नेतृत्व के लिए प्रार्थना की है।”
विकास सिंह ने भगवान परशुराम के स्वरूप पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “जिस तरह भगवान परशुराम ने धर्म की रक्षा के लिए कार्य किया था, उसी तरह हम इस स्वरूप के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि राहुल गांधी देश के संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह हमारा उनके प्रति सम्मान और स्नेह का भाव है।”
सियासी हलचल
काशी में हुए इस अनोखे जन्मदिन समारोह ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। हालांकि कांग्रेस इसे राहुल गांधी के प्रति निष्ठा और धर्म की रक्षा का प्रतीक बता रही है, लेकिन विपक्षी खेमे इसे आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस का नया सियासी दांव मान रहे हैं।

