ओबरा (ऋषभ सिंह)सोनभद्र। राम मंदिर प्रांगण में चल रही सात दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह का पावन प्रसंग सुनाया गया। व्यास पीठ से अंतरराष्ट्रीय कथावाचक श्री दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने विवाह मंडप की अलौकिक छटा का वर्णन करते हुए कहा कि मंडप के मणियुक्त खंभों में माता सीता को प्रभु राघव का स्वरूप नजर आ रहा था। यह दृश्य केवल सौंदर्य का नहीं, बल्कि प्रतीक्षा, गहरी चाहत और ईश्वर की ओर बढ़ जाने के दिव्य संस्कारों का प्रतीक है।

चरित्र गाथा को आगे बढ़ाते हुए व्यास जी ने मिथिलांचल की अद्भुत परंपराओं को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि विवाह के समय जब अवधवासी भोजन के लिए बैठे, तब जनकपुर की सखियों ने मधुर स्वर में प्रेममयी ‘गारी’ (परिहास गीत) गाकर सबका सत्कार किया। कथा में “पात-पात पुछत बतिया” जैसे पारंपरिक मैथिली गीतों के प्रसंग पर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। कथाव्यास ने संदेश दिया कि आज के परिवारों में आ रहे सूनेपन और आपसी झगड़ों को दूर करने के लिए दांपत्य जीवन में मर्यादा और प्रेम के इन्हीं सुंदर भावों को उतारना अनिवार्य है। इस मांगलिक अवसर पर ब्रिजेश पांडे ताड़केश्वर केशरी शिवनाथ जायसवाल कपूर चंद पांडे धुरंधर शर्मा बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे तथा सुरक्षा व्यवस्था में ओबरा पुलिस बल के आरक्षी अंत तक मुस्तैद रहे।

