(ऋषभ सिंह)सोनभद्र: सोनभद्र के वन क्षेत्रों में बढ़ते औद्योगिक दबाव और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के खिलाफ आदिवासी और वनवासी समुदाय लामबंद हो गया है। सोमवार को ‘किसान नौजवान संघर्ष मोर्चा’ के संयोजक संदीप मिश्रा के नेतृत्व में आदिवासी समुदाय का एक विशाल प्रतिनिधिमंडल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के जिलाध्यक्षों से मिला। इस दौरान उन्होंने ज्ञापन सौंपकर अपनी पूर्वजों की विरासत और पर्यावरण की रक्षा के लिए राजनीतिक हस्तक्षेप और समर्थन की पुरजोर मांग की।
“विकास के नाम पर विस्थापन बर्दाश्त नहीं”
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास के नाम पर आदिवासियों को उनकी जमीन और जंगलों से बेदखल करने की साजिश किसी भी सूरत में सफल नहीं होने दी जाएगी। मोर्चा संयोजक संदीप मिश्रा ने कहा कि सोनभद्र के वन क्षेत्रों में परियोजना-आधारित दबाव से न केवल आदिवासी संस्कृति, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका भी खतरे में पड़ गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि संपूर्ण इकोसिस्टम और स्थानीय समुदायों के अस्तित्व का आधार हैं।

आदिवासियों का संकल्प: “पेड़ हैं तो प्राण हैं”
आंदोलन के दौरान “पेड़ हैं तो प्राण हैं” अभियान के सह-संयोजक गुलाब चेरो ने भावुक होकर कहा, “पेड़ हमारे जीवन का आधार हैं। यदि जंगल बचे रहेंगे, तभी हमारी आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित रहेंगी। इसके लिए हमें किसी भी हद तक संघर्ष करना पड़े, हम पीछे नहीं हटेंगे।”
वहीं, नगवां ब्लॉक संयोजक विन्दू खरवार ने कहा कि वन क्षेत्र उनके पूर्वजों का घर है और इसे बचाना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अपनी पहचान और संस्कृति की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया।

रोजगार के दावों पर उठे सवाल
अभियान के जिला संयोजक रामसूरत खरवार ने औद्योगिक विकास के दावों पर कड़ा प्रहार करते हुए पूछा कि जिले में स्थापित बड़े उद्योगों ने कितने स्थानीय आदिवासी युवाओं को स्थायी रोजगार दिया है? उन्होंने कहा कि उद्योग लगाने के नाम पर केवल आदिवासियों को उजाड़ने का काम किया जा रहा है, जिसका जवाब सरकार और प्रशासन को देना चाहिए।
आंदोलन को धार देने की चेतावनी
ज्ञापन के माध्यम से राजनीतिक दलों से जनभावनाओं का सम्मान करने और वनों की कटाई रोकने की मांग की गई है। संघर्ष मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो गांव-गांव जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और आंदोलन को जिला मुख्यालय से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक ले जाया जाएगा। इस दौरान “जंगल बचाओ, जीवन बचाओ” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। कार्यक्रम में रामसूरत खरवार, विन्दू अगरिया, रामहाल खरवार, गुलाब चेरो, दिनेश पनिका, टहलराम माझि, आकाश चौहान, सत्रुधन बिन्द, सुरज कनौजिया, संजय बियार, सुजित विश्वकर्मा और नागेन्दर धागर सहित सैकड़ों की संख्या में आदिवासी, किसान और वनवासी कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

