सोनभद्र,। निर्वाचक नामावली से किसी व्यक्ति का नाम कटवाने के लिए फार्म-7 के माध्यम से झूठी और मनगढ़ंत शिकायत करना अब भारी पड़ सकता है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के तहत जानबूझकर मिथ्या घोषणा करने पर एक वर्ष तक के कारावास, जुर्माने अथवा दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है। जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री चर्चित गौड़ ने रविवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए जनसामान्य को आगाह किया कि निर्वाचक नामावली की तैयारी, पुनरीक्षण एवं शुद्धि के दौरान फार्म-7 का इस्तेमाल पूरी जिम्मेदारी के साथ किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से किसी प्रविष्टि को हटाने के लिए जानबूझकर गलत तथ्य प्रस्तुत करना या झूठी लिखित घोषणा करना दंडनीय अपराध है।
जिलाधिकारी ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग की ओर से निर्वाचकों को व्यक्तिगत रूप से बल्क में फार्म-7 उपलब्ध कराने की सीमा के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 में मिथ्या घोषणा करने वालों के लिए दंडात्मक प्रावधान निर्धारित हैं।
झूठी शिकायत मिलने पर होगी विधिक कार्रवाई
जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि यदि निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के संज्ञान में आता है कि फार्म-7 के माध्यम से की गई शिकायत झूठी अथवा मनगढ़ंत है, तो संबंधित आवेदक के विरुद्ध नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी। कानून के तहत ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है, जो किसी कथन या लिखित घोषणा के झूठा होने की जानकारी अथवा विश्वास होने के बावजूद उसे प्रस्तुत करता है।
सही जानकारी देने की अपील
जिलाधिकारी ने जनपद के सभी नागरिकों से अपील की कि निर्वाचक नामावली से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत करते समय सही, प्रमाणिक एवं तथ्यात्मक जानकारी ही उपलब्ध कराएं। फार्म-7 का प्रयोग किसी का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटवाने के लिए न करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की गलत घोषणा करने पर संबंधित व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

