आरक्षित वन भूमि पर अवैध जुताई का प्रयास विफल; वन विभाग की त्वरित कार्रवाई, 10 हेक्टेयर भूमि पर होगा वनीकरण

मदन मोहन चंदौली : नौगढ़ विकास खंड नौगढ़ अंतर्गत जयमोंहनी रेंज के अमदहां कंपार्टमेंट में प्रातः काल आरक्षित वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण और कृषि कार्य के उद्देश्य से की जा रही जुताई को वन विभाग की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए विफल कर दिया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आरक्षित क्षेत्र में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप भारतीय वन अधिनियम का गंभीर उल्लंघन है।
प्रातः 08:16 बजे हुई त्वरित कार्रवाई
बुधवार सुबह ठीक 08:16 बजे जयमोंहनी रेंज के अमदहां कंपार्टमेंट में अवैध जुताई की गोपनीय सूचना वन विभाग को प्राप्त हुई। रेंज प्रशासन ने बिना समय गंवाए एक त्वरित कार्यबल (टास्क फोर्स) का गठन किया। मौके पर पहुंचे वनरक्षक चंद्रशेखर, प्रेम सिंह, भोला एवं अन्य वन कर्मियों ने न केवल अवैध कार्य को तत्काल रुकवाया, बल्कि अतिक्रमणकारियों को सीमा से बाहर खदेड़ दिया।
10 हेक्टेयर आरक्षित क्षेत्र में ‘वृहद वनीकरण’ प्रस्तावित
रेंज अधिकारी अमित श्रीवास्तव के अनुसार, जिस 10 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जे का प्रयास किया जा रहा था, वह विभाग के आगामी वृहद वनीकरण कार्यक्रम के लिए आरक्षित है।
प्रस्तावित कार्य योजना बड़े पैमाने पर सघन पौधरोपण वैज्ञानिक पद्धति से गड्ढों की खुदाई सुरक्षा के लिए बाहरी सीमा पर सुरक्षा नाली (Trench) का निर्माण वैधानिक चेतावनी: “कब्जे से नहीं मिलता विधिक अधिकार” वन क्षेत्राधिकारी ने विधिक स्थिति स्पष्ट करते हुए अतिक्रमणकारियों को कड़े शब्दों में सचेत किया है:
आरक्षित वन भूमि पर वर्षों से खेती कर लेने मात्र से किसी भी व्यक्ति का विधिक स्वामित्व (Ownership) या मालिकाना हक स्थापित नहीं हो जाता। जिन लोगों ने पूर्व में अवैध कब्जे किए हैं, वे स्वतः अपनी फसलें और अतिक्रमण हटा लें। भविष्य के लिए सख्त कानूनी दिशा-निर्देश:
भारतीय वन अधिनियम के तहत कार्रवाई: दोबारा प्रयास करने पर संबंधित धाराओं में नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज होगी। सामग्री की जब्ती: अवैध कार्य में लिप्त पाए जाने वाले ट्रैक्टर, रोटावेटर, कृषि यंत्र एवं अन्य उपकरणों को वन अधिनियम के तहत मौके पर ही सीज (जब्त) कर लिया जाएगा। जनता से अपील वन प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे वनों की सुरक्षा को राष्ट्रीय संपत्ति मानकर सहयोग करें। आरक्षित वन भूमि के अतिक्रमण मुक्त होने से क्षेत्र का हरित आवरण (Green Cover) बढ़ेगा और जैव विविधता (Biodiversity) को दीर्घकालिक संरक्षण मिलेगा।

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