अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु व उत्तम स्वास्थ्य को लेकर सनातनी महिलाओं ने वट सावित्री व्रत का पूजन किया

(जितेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी)दुद्धी सोनभद्र भारत परंपराओं और संस्कृति की नगरी है जहां पर विभिन्न पर्व – त्यौहार में प्रकृति की उपासना के साथ कुटुंब परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत उपवास पूजन के द्वारा पुरुषार्थ की प्राप्ति को परम सौभाग्य व ईश्वर का आदेश मानकर आस्था के साथ पर्व मनाया जाते हैं। उक्त संदर्भ में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने कहा था – “भारत कोई भूमि का टुकड़ा नहीं है यह एक जीता जागता राष्ट्र पुरुष है। यह वंदन की धरती है, यह अभिनंदन की भूमि है। यह अर्पण की भूमि है, यह तर्पण की भूमि है। इसकी नदी – नदी हमारे लिए गंगा है, इसका कंकड – कंकड़ हमारे लिए शंकर है। हम जिएंगे तो भारत के लिए और मरेंगे तो भारत के लिए। ” ऐसे पावन भूमी भारत के कोने कोने में ” वट सावित्री व्रत ” का जो देवी सावित्री के नाम पर पड़ा जिन्होंने मृत पति सत्यवान को यमराज में मुख से भी पति के प्रति अटूट निष्ठा प्रेम से मौत कों भी मात देकर पति के जीवन की रक्षा की।

तब से अमर प्रेम कथा के रूप में इस व्रत अनुष्ठान का संपादन विवाहित महिलाओं द्वारा ज्येष्ठ माह की अमवस्या /पूर्णिमा कों पूजन बरगद के वृक्ष के नीचे जिसमें जगत के पालनहार ब्रह्मा, विष्णु व महेश का स्थान मानकर महिलाओं द्वारा 16 श्रृंगार के साथ सज धजकर सत्यवान की कथा व बरगद के वृक्ष की 7, 11 या 108 परिक्रमा कच्चा सूत लेकर करती है। दुद्धी नगर में जहाँ वार्ड 5 स्थित त्रिभुवन खेल मैदान व पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस स्थित बरगद के पेड़ के नीचे प्रातः महिलाओं द्वारा विधि विधान से पूजन अर्चन पति की लंबी आयु की अमर प्रेम कथा के साथ किया। जहाँ नगर पंचायत दुद्धी अध्यक्ष कमलेश मोहन द्वारा पंडाल कुर्सी लगाकर व्रतधारी माता का सहयोग किया गया। जहाँ पंकज अग्रहरि, भाजपा मंडल अध्यक्ष दीपक शाह आदि लोंग मौजूद रहें।

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