शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट के स्थापना दिवस पर वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश द्विवेदी को सम्मानित किया

शशिचौबे (सोनभद्र)शहीद स्थल प्रवंधन ट्रस्ट करारी के द्वारा सोनभद्र के स्थापना वर्ष गांठ के अवसर पर एक शानदार काव्य गोष्ठी एवं सम्मान समारोह रविवार को आयोजित की गई। जिसमे काव्य गोष्ठी की शुरुआत विधिवत वाग्देवी मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण दीपदान के साथ किया गया। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार तथा ट्रस्ट के संरक्षक एवं सोन साहित्य संगम के निदेशक मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी मधु गोरखपुरी ने और संचालन अशोक तिवारी ने किया। ।कियावाणी वंदना करते हुए दिवाकर मेघ ने मां शारदे वर दे हमें तव स्मरण करते रहें सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।ओज व श्रृंगार की सशक्त हस्ताक्षर कवयित्री कौशल्या चौहान ने दिल में हिन्दुस्तान रखती हूं, गीता बाइबिल कुरान रखती हूं सुनाया और देश को नमन किया तो वहीं श्रृंगार की रचना चांदनी बन सदा मैं चमकती रहूंगी नेह की रागिनी बन कर सदा बजती रहूंगी।काफी सराही गई। इस दौरान ट्रस्ट के संस्थापक निर्देशक प्रद्युम्न तिवारी ने कहा कि डाला गोली कांड दो जून को ध्यान में रखकर ही शहीद स्थल की स्थापना की गई । आगे उन्होंने यह भी कहा कि शहीद स्थल प्रवंधन ट्रस्ट करारी ने,सरहद के पहरेदारों को शत-शत मेरा प्रणाम जाये।देश खड़ा है साथ आपके ए मेरा पैगाम जाये।। ओज पूर्ण भाव देकर खूब तालियां बजवाते रहे। इस अवसर पर अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी को अंगवस्त्र, लेखनी पुस्तिका, प्रशस्ति पत्र, माल्यार्पण कर उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उनका सारस्वत अभिनंदन किया गया। लोकभाषा के कवि दयानंद दयालू ने एक दिन पेशी होई गुरू के अदालत में रहना कौनो हालत में सुनकर लोग करुणा से ओत-प्रोत हो गये। संचालन कर रहे अशोक तिवारी ने चांदनी की जमीं पर छटा देखकर, चांद के पार हमको भी जाना पड़ा शायरी सुनाकर वाहवाही बटोरी। धर्मेश चौहान ने राष्ट्र को वंदन करते हुए वतन के लिए जीवन कुर्बान हो गया तो वहीं सोन साहित्य संगम के संयोजक राकेश शरण मिश्र नोटरी अधिवक्ता ने गंभीर रचना,, युद्ध युद्ध बस युद्ध छिड़ा है, सुनाकर मानवता पर बल देते हुए सबको आईना दिखाया। उनकी यह रचना काफी सराही गई।ओज राष्ट्र वाद के सजग प्रहरी प्रभात सिंह चंदेल ने हाथों में तिरंगा कलेजे में हिन्दुस्तान रखता हूं सुनाया और वीर रस का जज्बा जगाया।इस अवसर पर दिलीप सिंह दीपक, जयराम सोनी, सुधाकर स्वदेशप्रेम आदि कवियों ने काव्य पाठ किया। अध्यक्षता कर रहे मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी ने हाय ये प्रचंड धूप, अधरों में प्यास लिए दौड़ रहे कूप कूप खासुनाकर श्रमिक की पीर को उकेरा और पूर्णता प्रदान किया तथा कवियों को आशीर्वाद दिया। आभार आयोजक प्रदुम्न त्रिपाठी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर रिषभ शिवमोचन, सोनू, फारुख अली, हाशमी ठाकुर कुशवाहा, शिखा, मृत्युंजय, ममता ,समता, आत्मप्रकाश तिवारी जयशंकर त्रिपाठी एड देवानंद पांडेय आदि कविता प्रेमी एवं प्रश्न के सम्मानित सदस्य मौजूद रहे।

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