मदन मोहन, चंदौली : के नौगढ़ क्षेत्र स्थित जयमोहनी वन रेंज के भरदुआ गांव में सोमवार को उस समय हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए, जब वन विभाग की करीब 30 बीघा सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने पहुंची प्रशासनिक टीम का ग्रामीणों ने अभूतपूर्व विरोध कर दिया। देखते ही देखते पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। महिलाओं ने जेसीबी और ट्रैक्टरों के आगे लेटकर कार्रवाई रोक दी, जबकि सैकड़ों ग्रामीण मौके पर डट गए। कई घंटे तक चले हाई-वोल्टेज घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक टीम को बिना कार्रवाई किए वापस लौटना पड़ा।
वन विभाग की टीम सरकारी भूमि पर कब्जा हटाने और सुरक्षा के लिए ट्रेंच (खाई) खोदने पहुंची थी। जैसे ही जेसीबी और ट्रैक्टरों ने काम शुरू किया, ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए। महिलाओं ने वाहनों का घेराव कर दिया और कई महिलाएं ट्रैक्टरों पर चढ़ गईं। जेसीबी आगे बढ़ी तो महिलाएं उसके सामने जमीन पर लेट गईं और कार्रवाई का पुरजोर विरोध करने लगीं।
विरोध के दौरान महिलाओं की पीड़ा खुलकर सामने आई। उनका कहना था कि वे वर्षों से इसी जमीन पर खेती कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। उनका कहना था कि यदि उन्हें यहां से हटाया गया तो उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग भी उठाई।
ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि यदि भूमि पर उनका कब्जा वर्षों पुराना है तो अब अचानक कार्रवाई क्यों की जा रही है। गांव में यह चर्चा भी रही कि कहीं यह अभियान अन्य क्षेत्रों के संभावित विस्थापितों को बसाने की तैयारी का हिस्सा तो नहीं है। हालांकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
स्थिति बिगड़ती देख चकिया क्षेत्राधिकारी के नेतृत्व में नौगढ़, चकरघट्टा, चकिया और साहबगंज थानों की भारी पुलिस फोर्स मौके पर तैनात की गई। काफी देर तक समझाने-बुझाने के प्रयास हुए, लेकिन ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए वन विभाग के एसडीओ वरुण सिंह ने फिलहाल अभियान स्थगित करने का निर्णय लिया।
उपजिलाधिकारी नौगढ़ विनय मिश्रा ने स्पष्ट कहा कि सरकारी वन भूमि पर अवैध कब्जा किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। फिलहाल कानून-व्यवस्था के मद्देनजर टीम वापस लौटी है, लेकिन आवश्यक तैयारियों और पर्याप्त सुरक्षा बल के साथ जल्द ही दोबारा अभियान चलाकर सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया जाएगा।

