(ऋषभ सिंह)सोनभद्र : के ओबरा थाना क्षेत्र में लापरवाही के बीच एक बड़ा हादसा उस वक्त टल गया जब रेणुका घाट घूमने पहुंचे 11 लोग अचानक बढ़े जलस्तर के कारण नदी के बीच बने टापू में फंस गए। ओबरा बांध से पानी छोड़े जाने के बाद देखते ही देखते नदी का बहाव तेज हो गया और टापू चारों तरफ से पानी से घिर गया। अंधेरा होने के बीच घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन में पुलिस, स्थानीय युवकों और जनप्रतिनिधियों की मदद से सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने एक बार फिर घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और चेतावनी तंत्र की पोल खोल दी है।
ओबरा के रेणुका छठ घाट पर उस समय अफरा-तफरी मच गई जब घूमने आए लोग नदी के बीच बने टापू पर पहुंच गए और अचानक बढ़े जलस्तर के कारण वहीं फंसकर रह गए। नदी में पानी कम होने के कारण लोग बेफिक्र होकर टापू तक पहुंच गए थे और फोटो व सेल्फी लेने में मशगूल थे। इसी बीच बांध से पानी छोड़े जाने के बाद नदी का स्वरूप अचानक बदल गया।
कुछ ही देर में जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा और नदी का बहाव इतना तेज हो गया कि टापू चारों तरफ से पानी से घिर गया। किनारे पर मौजूद लोगों ने फंसे लोगों को बाहर आने के लिए आवाज लगाई लेकिन तब तक हालात नियंत्रण से बाहर हो चुके थे। कुछ लोग किसी तरह सुरक्षित निकल आए जबकि 11 लोग बीच धारा में फंस गए और मदद का इंतजार करने लगे।
सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और डैम प्रबंधन से संपर्क कर पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया पर रोक लगवाई गई। इसके बावजूद नदी का बहाव काफी देर तक तेज बना रहा जिससे फंसे लोगों को टापू पर ही रुकना पड़ा। देखते ही देखते अंधेरा भी छा गया और रेस्क्यू अभियान चुनौतीपूर्ण हो गया।
मौके पर पुलिस टीम, पीआरवी और अन्य अधिकारी पहुंच गए। नगर पंचायत के सभासद अजीत कनौजिया, स्थानीय युवकों और पुलिसकर्मियों ने संयुक्त रूप से राहत अभियान चलाया। लगातार प्रयासों के बाद सभी 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। सुरक्षित रेस्क्यू के बाद फंसे लोगों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेणुका घाट पर अचानक जलस्तर बढ़ने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं और अतीत में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद घाट पर पर्याप्त चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा के स्थायी इंतजाम नहीं हैं। कम पानी देखकर लोग नदी के भीतर चले जाते हैं और बांध से पानी छोड़े जाने पर कुछ ही मिनटों में हालात खतरनाक हो जाते हैं। यह घटना भले ही बिना किसी जनहानि के समाप्त हो गई हो, लेकिन इसने साफ कर दिया है कि यदि समय रहते रेस्क्यू नहीं होता तो रेणुका घाट पर एक बड़ा हादसा हो सकता था। अब स्थानीय लोग घाट पर प्रभावी चेतावनी व्यवस्था, सुरक्षा बैरिकेडिंग और स्थायी निगरानी की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

