ग्राम विकास कार्यों की उच्च स्तरीय जांच की मांग, भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का ऐलान

ओबरा (ऋषभ सिंह)सोनभद्र। भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए महताब आलम के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने उप जिलाधिकारी ओबरा को ज्ञापन सौंपकर ग्राम विकास अधिकारी अभिषेक सिंह की पुनः तैनाती, स्थानांतरण नीति के संभावित उल्लंघन तथा ग्राम पंचायत परसोई सहित अन्य ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि ग्राम पंचायत परसोई सहित संबंधित ग्राम पंचायतों में कराए गए रीबोर (हैंडपंप मरम्मत एवं पुनर्स्थापन) एवं अन्य विकास कार्यों की तकनीकी, वित्तीय तथा गुणवत्तापरक जांच किसी स्वतंत्र एवं सक्षम एजेंसी से कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सभी कार्य शासन द्वारा निर्धारित मानकों एवं वित्तीय नियमों के अनुरूप कराए गए हैं या नहीं।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि लगभग आठ वर्षों तक एक ही विकास खंड में कार्यरत रहने के बाद ग्राम विकास अधिकारी की पुनः उसी विकास खंड में तैनाती किन परिस्थितियों में और किस सक्षम अधिकारी की स्वीकृति से की गई, इसकी भी निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही जिला विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी एवं मुख्य विकास अधिकारी की भूमिका की जांच कर उत्तरदायित्व तय करने की भी मांग उठाई गई।
इस अवसर पर महताब आलम ने कहा कि जिले के कुछ अधिकारी खुलेआम शासन के मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की शिकायत प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग से की जाएगी और भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के खिलाफ उनका संघर्ष लगातार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जनहित से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने मांग की कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितता, स्थानांतरण नीति के उल्लंघन अथवा भ्रष्टाचार के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान शिब्बु शेख, संतोष कनौजिया, सोनी खान, विकास कुमार गौड़, शरीफ खान, शंभू पटेल, प्रकाश पटेल, जलालुद्दीन अंसारी, चंद्रशेखर माली, दिनेश केसरी, राजकुमार, मोहम्मद इशराइल सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

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