ऐतिहासिक सांस्कृतिक , प्रकृति सानिध्य, मानवीय प्रेम का प्रतीक पर्व दीपावली

भोपाल : पर्यावरण संस्कृति संरक्षण एवं मानव कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने भोपाल शहर में विभिन्न कार्यक्रम के माध्यम से भारत में दीपावली मनाने के विभिन्न ऐतिहासिक, पौराणिक, सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। आपने कहा भारत देश में विभिन्न धर्मों में दीपावली मनाने के कई कारण है।

जिनमें हिंदू धर्म में भगवान राम की रावण पर विजय और अयोध्या वापसी।

महाभारत के अनुसार, पांडवों ने भी इसी दिन अपने 13 साल के वनवास को समाप्त किया था।

इसी दिन भगवान विष्णु ने राजा महाबली को पाताल लोक का स्वामी बनाया था और इन्द्र ने स्वर्ग को सुरक्षित जानकर प्रसन्नतापूर्वक दीपावली मनाई थी।

इसी दिन भगवान विष्णु ने नरसिंह रुप धारणकर हिरण्यकश्यप का वध किया था।

इसी दिन समुद्रमंथन के पश्चात लक्ष्मी व धन्वंतरि प्रकट हुए थे।देवी लक्ष्मी की पूजा कर यह धन और समृद्धि की देवी लक्ष्मी का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है।

दक्षिण भारत में दीपावली का यह त्यौहार उस दिन को चिह्नित करता है जब भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर को हराया था।

धनतेरस के दिन, सागर मंथन से देवी लक्ष्मी के जन्म का स्मरण किया जाता है।

इसी प्रसंग मे चौथे दिन को बलि प्रतिपदा कहा जाता है और यह भगवान विष्णु के वामन अवतार द्वारा राजा बलि को परास्त करने का प्रतीक है।

इसी प्रसंग मे राक्षसों का वध करने के बाद भी जब महाकाली का क्रोध कम नहीं हुआ तब भगवान शिव स्वयं उनके चरणों में लेट गए। भगवान शिव के शरीर स्पर्श मात्र से ही देवी महाकाली का क्रोध समाप्त हो गया। इसी की याद में उनके शांत रूप लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत हुई। इसी रात इनके रौद्ररूप काली की पूजा का भी विधान है।

दिवाली ही के दिन सिक्खों के छ्टे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को कारागार से रिहा किया गया था। इसी दिन अमृतसर में 1577 में स्वर्ण मन्दिर का शिलान्यास हुआ था।

गौतम बुद्ध के अनुयायियों ने 2500 वर्ष पूर्व गौतम बुद्ध के स्वागत में लाखों दीप जलाकर दीपावली मनाई थी। कुछ बौद्ध धर्म अनुयायी इस दिन को नेपाल के नेवार बौद्ध इसे बुद्ध की पूजा करके मनाते हैं।

इसी दिन उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य का राजतिलक हुआ था।

इसी दिन आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती का निर्वाण हुआ था।

दीपावली पर्व जैन धर्म के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन भगवान महावीर को मोक्ष (ज्ञान) प्राप्त हुआ था, जो सांसारिक इच्छाओं से मुक्ति का प्रतीक है। इस अवसर पर ज्ञान और मुक्ति का जश्न मनाया जाता है। हालांकि, इन सभी के पीछे बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का एक सामान्य विषय है। उक्त सभी कारणों से हम दीपावली का त्योहार मनाते हैं।

इसके अतिरिक्त भी दीपावली पर्व खरीफ की फसल के आगमन पर प्रकृति को, गोवर्धन पूजा के रूप में गौ माता की मानव को उपलब्धियां को समर्पित किया जाता है। दीपावली पर्व प्रकृति में विद्यमान प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से हमारे सहयोगीयो पशु ,पक्षी , प्रकृति की कृतज्ञता को स्वीकारने का पर्व है।

इस संदर्भ में आपने बताया कि प्रकृति में पटाखों से नाइट्रेट्स, बेरियम, पोटेशियम,सोडियम, सल्फर, एल्युमीनियम, लीथियम, तांबा, सीसा, कैडमियम, मैग्नीशियम जस्ता और कई अन्य विषाक्त पदार्थों का नुकसानदेह धुआं निकलता है । जिसके द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बनमोनो डाइऑक्साइड जहरीली गैस उत्पन्न होती हैं ।

तांबा : इसके संपर्क में आने पर श्वसन तंत्र में तकलीफ होती है।

सीसा : तंत्रिका तंत्र को गंभीर हानि।

कैडमियम : ब्लड को ऑक्सीजन पहुंचाने की क्षमता प्रभावित करता है।
मैग्नीशियम: धुएं से मेटल फ्यूम फीवर होने की आशंका बढ़ जाती है।

जस्ता: धातु जैसी सुगंध से बुखार और उल्टी की तकलीफ।

सोडियमः ये रिएक्टिव तत्व है,इससे व्यक्ति जल सकता है।

फटाको से वायु ,जल ,ध्वनि, मृदा प्रदूषण होता हैं और हमारी भूमि की उर्वरा शक्ति घटती है, वह इससे दमा स्क्रीन चर्म रोग डायबिटिक, मानसिक रोग, तनाव ,ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, आखों के रोग, कान के रोग , किसी प्रकार की शारीरिक क्षति और पशु पक्षियों और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य में हानि होती है जो पशु-पक्षी पक्षी पेड़ पर रहते हैं बम की आवाज कि धमक से उनके अंडे घोसलों से गिर जाते हैं और फूट जाते हैं । हम 85 डेसिमल तक की आवाज सुन सकते हैं इससे ऊपर हमारे कानों का पर्दा फट सकता है ! हमें दीपावली के पावन पर्व पर जरूरतमंद व्यक्तियों की आर्थिक मदद करना चाहिए एवं उनकी मूलभूत आवश्यकताओं व शिक्षा के लिए धन का उपयोग कर उनके जीवन में प्रकाश करना चाहिए एवं वृक्षारोपण कर धरती को हरा भरा कर प्रकृति को एवम जैव विवधता को संरक्षित करना चाहिए।

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