भारत देश का हृदय मध्य प्रदेश, स्थापना दिवस 1 नवंबर

भोपाल : भारत देश को अंग्रेजों की हुकूमत से आजाद होने के बाद मध्य प्रदेश का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ था। भारत देश को आजाद करने में मध्य प्रदेश के कुछ प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने घोर संघर्ष किया।स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में अलीराजपुर से चंद्रशेखर आज़ाद, झांसी ग्वालियर से रानी लक्ष्मीबाई, शिवपुरी से तात्या टोपे, और डिंडोरी से रानी अवंती बाई, निमाड़ क्षेत्र से तांट्या भील (टंट्या मामा) शामिल हैं। इसके अलावा, तांट्या भील, झलकारी बाई, सेठ गोविंद दास, शंकर शाह, और रविशंकर शुक्ल जैसे कई अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने मध्य प्रदेश की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जंगल सत्याग्रह स्वतंत्रता संग्राम में मध्य प्रदेश का एक अद्वितीय योगदान है। भारत लगभग 200 वर्षों बाद अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों को तोड़कर आजाद हो सका। भारत के विभिन्न राज्यों का गठन समयांतर के साथ शने शने हुआ।

भारत के मध्य में स्थित होने के कारण पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस राज्य का नाम मध्य प्रदेश रखा था। 2000 तक क्षेत्रफल की दृष्टि से मध्य प्रदेश भारत का सबसे बड़ा राज्य था।

मध्य प्रदेश की प्रमुख विशेषताओं में भारत के केंद्र में इसका स्थान, विविध भौगोलिक संरचना (पहाड़, पठार, नदियाँ), समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत यहाँ विंध्य और सतपुड़ा जैसी पर्वत श्रृंखलाएँ, उपजाऊ पठार और मैदानी इलाके शामिल हैं। वन और खनिज संसाधनों की प्रचुरता और विभिन्न प्रकार की जलवायु शामिल हैं। इसे अक्सर ‘भारत का हृदय’ कहा जाता है क्योंकि यह देश के केंद्र में स्थित है, जिसकी कोई अंतर्राष्ट्रीय सीमा नहीं है।

मध्य प्रदेश के उत्तर में स्थित उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश के पूर्व में स्थित छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश के दक्षिण में स्थित महाराष्ट्र ,मध्य प्रदेश के पश्चिम में स्थित गुजरात ,मध्य प्रदेश के उत्तर-पश्चिम में राजस्थान स्थित है।

मध्य प्रदेश निमाड़, मालवा, बुंदेलखंड ,बघेलखंड, महाकौशल, ग्वालियर,रीवा आंचल की विभिन्न विशेष संस्कृति एवं विभिन्न कला, विशेष अनुकूल जलवायु से बना खुशहाल प्रदेश है।

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विशेषताओ मैं भी मध्य प्रदेश का कोई जवाब नहीं यह राज्य प्राचीन काल से ही सभ्यताओं का केंद्र रहा है।

मध्य प्रदेश में उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर, चित्रकूट, अमरकंटक,मेहर,सलकनपुर, सोनागिर तीर्थ क्षेत्र के प्राचीन मंदिर की महिमा अपरंपार है, जो अन्य राज्यों से वह अन्य देशों से श्रद्धालुओं को अपनी और दर्शनार्थ आकर्षित करती है। पुरातात्विक साक्ष्यों में भीमबेटका की गुफाएँ इसके प्राचीन इतिहास की गवाह हैं। सांस्कृतिक विविधता यहां की विशेष पहचान है । हिंदू, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, जैन और जनजातीय संस्कृतियों का यहाँ मिश्रण है,जो राज्य को विविधता में एकता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनाता है।

आज मध्य प्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में अन्य राज्यों से भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।अपने समृद्ध इतिहास और संस्कृति के कारण यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल है,जहाँ राष्ट्रीय उद्यान (कान्हा, बांधवगढ़), ऐतिहासिक किले और प्राकृतिक सौंदर्य स्थल मध्य प्रदेश में स्थित हैं।मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल भी जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और आधुनिक शहरी नियोजन के लिए जानी जाती है।

मध्य प्रदेश को “नदियों का मायका” कहा जाता है क्योंकि यहाँ से कई प्रमुख नदियों का उद्गम होता है और यहाँ बहुत सी नदियाँ बहती हैं. राज्य में 200 से अधिक छोटी-बड़ी नदियाँ हैं, जिनमें से कई अन्य राज्यों में भी बहती हैं।नर्मदा, ताप्ती, चंबल, सोन और बेतवा जैसी प्रमुख नदियाँ राज्य से होकर बहती हैं,जिनमें से कई भारतीय प्रायद्वीप की महत्वपूर्ण नदियाँ हैं। मध्य प्रदेश की यह नदियां केवल जल संसाधन का स्रोत नहीं यहां के निवासियों के हृदय में माँ के रूप में शाश्वत पूजनीय है। नदियाँ मध्य प्रदेश की संस्कृति और जीवन का एक अभिन्न अंग हैं, और यहाँ नदियों के तटों पर कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो नदियों के प्रति यहां के रहवासीयो की गहरी आस्था को व्यक्त करते हैं।

मध्य प्रदेश में कई जलप्रपात हैं जो यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाते हैं, जिनमें धुआंधार जलप्रपात (जबलपुर), कपिलधारा जलप्रपात और दुग्धधारा जलप्रपात (अमरकंटक, अनूपपुर), सहस्त्रधारा जलप्रपात (महेश्वर, खरगोन), और बहुती जलप्रपात (रीवा) प्रमुख हैं। इनके अतिरिक्त, चंबल नदी पर चूलिया (मंदसौर), पातालपानी (इंदौर) और झाड़ीदार जलप्रपात (इंदौर) हैं, जबकि नर्मदा नदी पर मंधार और दहदी जलप्रपात भी मध्य प्रदेश को अन्य राज्यों से अलग विशेष पहचान दिलाते हैं।

राज्य का एक बड़ा हिस्सा धरती का ग्रीन गोल्ड गहना कहे जाने वाले वनों से आच्छादित है और यहाँ देश के सबसे अधिक वन पाए जाते हैं। यहाँ उपजाऊ काली मिट्टी (मालवा पठार और नर्मदा घाटी में) और लाल-पीली मिट्टी पाई जाती है जो यहां के नागरिकों को समृद्ध बनती है।

यहाँ की जलवायु मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय है, जिसमें ग्रीष्म ऋतु, मानसून और शुष्क शीत ऋतु का विशेष अनुभव यहां के बाशिंदो को होता है।

मध्य प्रदेश को “भारत की सोयाबीन राजधानी” कहा जाता है, इसके अतिरिक्त भी मध्य प्रदेश की प्रमुख फसलों में गेहूं, चावल,मक्का और चना शामिल हैं। जिसमें सोयाबीन और मक्का चावल जैसी खरीफ फसलें तथा गेहूं और चना जैसी रबी फसलें प्रमुख हैं। इसके अलावा, राज्य में कपास, गन्ना और दालों (जैसे अरहर, मूंग और मसूर) का भी व्यापक उत्पादन खुशहाली का प्रतीक है।कपास और गन्ना ,बागवानी मे अमरुद, सीताफल, नींबू, पपीता और अंगूर,का नगद व्यवसाय के रूप में कोई जवाब नहीं। औषधीय पौधे मे अश्वगंधा, एलोवेरा और लेमनग्रास का उत्पादन भी मध्य प्रदेश को खास बनाते हैं।

हमारे मध्य प्रदेश का राजकीय वृक्ष बरगद, राजकीय पशु बारहसिंघा और राजकीय पक्षी दूधराज (शाह बुलबुल) प्रदेश की शान है।

मध्य प्रदेश में संरक्षित क्षेत्रों में 12 राष्ट्रीय उद्यान, 22 वन्यजीव अभयारण्य और 3 बायोस्फीयर रिजर्व शामिल हैं,मध्य प्रदेश में अब नौ टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें माधव टाइगर रिजर्व भी शामिल है, जिसे हाल ही में नौवें टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित किया गया है। मध्य प्रदेश में कई वन्य प्राणी पाए जाते हैं, जिनमें बाघ,तेंदुआ,चीतल, चिंकारा, सांभर, नीलगाय, स्लॉथ भालू, जंगली सूअर, और बारहसिंगा (हार्ड ग्राउंड बारासिंघा) प्रमुख हैं।

किसी भी देश, प्रदेश की अर्थव्यवस्था वहां पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का निर्भर करती है । मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, प्राकृतिक संसाधनों (जैसे हीरा और तांबे का सबसे बड़ा भंडार) और इसके अतिरिक्त मैंगनीज, बॉक्साइट, चूना पत्थर, कोयला और लौह अयस्क, विनिर्माण (जैसे ऑटोमोबाइल, पेट्रोकेमिकल) पर आधारित है।

मध्य प्रदेश यहां के विशेष खानपान की वजह से भी भारत में अपना विशेष स्थान रखता है। यहा के विशेष खानपान में दाल-बाफला, पोहा-जलेबी, इंदौरी नमकीन और भुट्टे की कीस जैसे पारंपरिक और स्थानीय व्यंजन प्रसिद्ध हैं।

भारत देश में मध्य प्रदेश आज पवित्र प्राचीन तीर्थ क्षेत्रो, ऐतिहासिक पर्यटन स्थलो, पवित्र नदियों के प्रवाह से, यहां पाई जाने वाली उर्वरक मिट्टी, शुद्ध जीवन रक्षक प्राण वायु प्रदान करती विभिन्न वनस्पति, इन वनस्पतियों की रक्षा करते वन्य जीव, जैव विविधता ,ऐतिहासिक सामाजिक ,सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध है,तो दूसरी ओर विश्व में प्रसिद्ध बेशकिमती बहुमूल्य कीमती हीरो के प्राप्ति स्थान के रूप मे भी पहचाना जाता है।

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