भोपाल : स्थित गैर-सरकारी संगठन भोपाल अगेंस्ट इन जस्टिस (भाई) संस्था के तत्वावधान में विशेष साप्ताहिक सलाह चर्चा सभा का आयोजन चिनार पार्क पर सदस्यों द्वारा किया गया। सभा मे भाई संस्था के सदस्यों का विधि-निर्माताओं और प्रशासन का ध्यान पुरुषो के अधिकारों एवं समस्याओं की ओर आकर्षित करने बावत् पर्यावरण संस्कृति संरक्षण एवं मानव कल्याण ट्रस्ट अध्यक्ष सुशील कुमार जैन द्वारा सम्मान किया गया।संस्था से प्राप्त जानकारी के अनुसार सुशील कुमार जैन ने बताया कि भाई संस्था से देशभर मे 27 गैर सरकारी सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता , विधि विशेषज्ञ , मनोवैज्ञानिक , एवम विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।
सभा के दौरान वक्ताओं ने यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा कि समाज और कानून को यह समझना होगा कि पीड़ित केवल महिलाएं ही नहीं होतीं, कई बार पुरुष भी समान रूप में पीड़ित होते हैं। उपस्थित विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने जेंडर न्यूटुन (Gender Neutral) कानूनों की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि न्याय सभी के लिए समान रूप में सुनिश्चित किया जा सके।
‘भाई भोपाल’ संगठन के अध्यक्ष ने बताया कि यह सभा केवल चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि इसके माध्यम में समाज, विधि-निर्माताओं और प्रशासन का ध्यान पुरुषो के अधिकारों एवं समस्याओं की ओर आकर्षित करने का भी एक सशक्त प्रयोग किया गया। संगठन ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, जिसमे समाज में वास्तविक लैंगिक समानता स्थापित हो सके। सम्मेलन में पुरुषों और उनके परिवारों को प्रभावित करने वाले कई गंभीर और संवेदनशीन्न मुद्दों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। इन मुद्दों पर संगठन द्वारा निम्नलिखित बिंदुओं में प्रकाश डाला गया
अभिभावक अलगाव
तलाकशुदा या अलग रह रहे माता-पिता में से एक द्वारा बच्चे को दूसरे अभिभावक में दूर करने की प्रवृत्ति न केवल पारिवारिक रिश्तों को तोड़ती है, बल्कि बच्चे के मानसिक, भावनात्मक और मामाजिक विकास पर भी दीर्घकालिक नकारात्मक असर डालती है। वच्चों में असुरक्षा, अविश्वाम और भावनात्मक टूटन जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं, ऐसे बच्चों के अपराधी बनने की सम्भावना बहुत बढ़ जाती है.
वृद्ध माता-पिता को संतानों द्वारा त्यागना
आधुनिक जीवनशैली, व्यक्तिगत स्वार्थ और पारिवारिक मूल्यों के क्षरण के कारण वृद्ध माता-पिता की उपेक्षा बढ़ रही है। महिलावादी कानूनों का भय दिखाकर उन्हें आर्थिक, भावनात्मक और सामाजिक प्रतिष्ठा से वंचित किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप वे अकेलेपन, अवसाद और असुरक्षा की स्थिति में जीने को मजबूर हो जाते हैं।
पुरुषों का मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य –
सामाजिक दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, रोजगार का तनाव और कानूनी परेशानियां पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य महायता के पर्याप्त संसाधनों का अभाव पुरुषों को चुपचाप पीड़ा सहने के लिए मजबूर करता है।
झूठे 498A और घरेलू हिंसा के मामले
दहेज प्रताड़ना (498A) और घरेलू हिंसा संबंधी कानूनों का मूल उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना है, लेकिन कई बार इनका दुरुपयोग कर निर्दोष पुरुषों और उनके परिवारों को झूठे मुकदमों में फंसा दिया जाता है। इससे न केवल आर्थिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है, बल्कि लंबे समय तक मानसिक तनाव और पारिवारिक विघटन की स्थिति भी उत्पन्न होती है।
बलात्कार के झूठे केसों से पीड़ित पुरुषों और उनके परिवारों को सहायता
एक महिला के व्यान मात्र पर जब पुरुष झूठे यौन उत्पीड़न के मामलों में फंस जाते हैं, तो उन्हें और उनके परिवार को सामाजिक बहिष्कार, मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में उचित कानूनी और मनोवैज्ञानिक मदद की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
पुरुष आयोग के गठन की आवश्यकता
महिलाओं की तरह पुरुषों के अधिकारों और शिकायतों के निवारण के लिए एक स्वतंत्र आयोग का गठन आवश्यक है, जो उनकी समस्याओं पर गंभीरता से कार्रवाई कर सके।
पत्नि द्वारा Extra Marital Affairs रखने से आहत होकर पुरुषों द्वारा आत्महत्या ,वैवाहिक धोखे, मानसिक उत्पीड़न और सामाजिक अपमान के कारण कई पुरुष आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए संवेदनशील कानूनी और परामर्श तंत्र की जरूरत पर विशेष चर्चा की गई।

