सड़क ना होने से एक व्यक्ति की गई जान ग्रामीणों ने किया कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन।
(रँगेश सिंह)यूपी के सोनभद्र से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सुनकर आप भी सोच में पड़ जाएंगे। आज़ादी के 78 साल बाद भी, जिला मुख्यालय से सटे भरहीया और नई राजस्व गांव में पक्की सड़क नहीं बन सकी। महज़ 5 से 6 किलोमीटर की दूरी लेकिन सड़क इतनी बदहाल कि पैदल चलना भी ग्रामीणों के लिए चुनौती बन चुका है। यही लापरवाही एक बीमार अधेड़ की मौत का कारण बन गई। क्योंकि समय पर एम्बुलेंस गांव तक पहुंच ही नहीं पाई। विद्यालय जाने वाले बच्चों के लिए तो यह रास्ता किसी रोज़ाना के संघर्ष से कम नहीं। सवाल यह है कि जब विकास की बातें होती हैं, तो क्या इन गांवों की दुर्दशा प्रशासन और जन प्रतिनिधियों को नज़र नहीं आती।
राबर्ट्सगंज ब्लॉक क्षेत्र के भरहीया और नई राजस्व गांव को जोड़ने वाली सड़क वर्षों से खस्ताहाल है।
बीते दिनों इसी टूटी-फूटी सड़क पर एक बीमार अधेड़ ने दम तोड़ दिया… क्योंकि मदद वक्त पर नहीं पहुंची।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे स्कूल जाने में रोज़ाना मुश्किल झेलते हैं, जबकि आम लोगों के लिए रोजमर्रा का सफर किसी दंड से कम नहीं।
गुस्साए ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया और पक्की सड़क निर्माण की मांग को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।
वहीं इस संबंध में बात करते हुए एडवोकेट संतोष पटेल, जिलाध्यक्ष, विधिक मंच, अपना दल (एस) ने बताया कि हम भरहीया और नई राजस्व गांव के लिए पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं। आज़ादी को 78 साल हो गए, लेकिन आज तक यहां सड़क नहीं बनी। जिला मुख्यालय से महज़ 5-6 किलोमीटर की दूरी पर बसे गांव में अगर कोई बीमार हो जाता है, तो मुख्य मार्ग तक ले जाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। हाल ही में भरहीया निवासी बबन सिंह की मौत इसी वजह से हुई… समय पर एम्बुलेंस नहीं पहुंची और इलाज न मिलने से जान चली गई। जन प्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता की वजह से हजारों ग्रामीण रोज़ाना मुसीबत झेल रहे हैं।

