सोनभद्र। दुद्धी तहसील के बघाड़ू गांव में जनजातीय भूमि के हस्तांतरण से जुड़े चर्चित प्रकरण में जिला प्रशासन को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। प्रशासन के अनुसार, जनजातीय महिला रजिया उर्फ नन्हकी के नाम पर कराए गए भूमि बैनामों को जांच के बाद शून्य घोषित कर 40 गाटों की 5.7142 हेक्टेयर भूमि ग्राम सभा में निहित की गई थी। इस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने प्रशासन के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
जिला प्रशासन के मुताबिक, मामले में बहादुर अली पर आरोप था कि रजिया से निकाह के बाद उसकी पुरानी जनजातीय पहचान का इस्तेमाल करते हुए अनुसूचित जनजाति की संरक्षित भूमि के कई बैनामे कराए गए। प्रशासन का कहना है कि ऐसे 30 से अधिक भूमि सौदों की जांच के बाद कार्रवाई की गई और संबंधित भूमि को ग्राम सभा में निहित किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में भी बघाड़ू में रजिया के नाम पर कई बैनामों की प्रशासनिक जांच और कार्रवाई का उल्लेख है।
हाईकोर्ट में प्रशासन की कार्रवाई को चुनौती
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के अनुसार, जिला प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ रजिया ने अप्रैल 2026 में हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण कुमार की पीठ के समक्ष हुई। प्रशासन के मुताबिक, अदालत ने बैनामों को शून्य घोषित करने तथा भूमि को ग्राम सभा में निहित करने संबंधी कार्रवाई में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
जमीन पर जन उपयोगी विकास कार्यों की तैयारी
हाईकोर्ट के फैसले के बाद जिला प्रशासन ने इन जमीनों के जनहित में उपयोग की तैयारी शुरू करने की बात कही है। जिलाधिकारी के अनुसार, भूमि पर खेल का मैदान और बारात घर बनाए जाने की योजना है। इसके साथ ही समाज सुधारक बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित करने की दिशा में भी कार्रवाई की जा रही है। शेष भूमि पर आवश्यकता के अनुसार शासकीय भवनों के निर्माण की योजना बताई गई है।
जनजातीय पहचान और संरक्षण के दावे पर भी हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की जनजातीय समुदाय से निरंतर सामाजिक एवं सांस्कृतिक जुड़ाव के दावे पर भी विचार हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अदालत के समक्ष यह मुद्दा उठा कि लंबे समय तक दूसरे धर्म और रीति-रिवाजों के अनुसार जीवन व्यतीत करने के बाद अनुसूचित जनजाति के कानूनी संरक्षण का दावा किन परिस्थितियों में किया जा सकता है। अदालत के अनुसार, याचिकाकर्ता ऐसा ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकीं, जिससे मुस्लिम रीति से विवाह और लंबे समय तक अलग पहचान में रहने के बावजूद पनिका जनजातीय परंपराओं से निरंतर जुड़ाव साबित हो।
पहले भी सामने आ चुका है बघाड़ू का भूमि विवाद
बघाड़ू प्रकरण में प्रशासन की कार्रवाई पहले से ही चर्चा में रही है। दिसंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने जनजातीय महिलाओं के नाम पर कराए गए दर्जनों बैनामों की जांच शुरू की थी और उन्हें निरस्त कर भूमि को सरकारी खाते में दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी।
जिला प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य अनुसूचित जनजाति की संरक्षित भूमि के नियम विरुद्ध हस्तांतरण पर रोक लगाना और ऐसी भूमि का सार्वजनिक हित में उपयोग सुनिश्चित करना है।

