सोनभद्र : में पुलिस का अनोखा कारनामा सामने आया है. दरअसल 18 साल पहले चंदौली पुलिस एनकाउंटर में एक लाख रुपये इनामी नक्सली को मार गिराया था. अब सोनभद्र पुलिस ने मारे गए नक्सली को शांतिभंग के आरोप में पाबंद करते हुए उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय से समन जारी किया गया है. नक्सली की पत्नी कोर्ट का चक्कर लगा रही है।
बता दें कि साल 2007 में चंदौली पुलिस ने एनकाउंटर में 1 लाख रुपये के इनामी हार्डकोर नक्सली संजय उर्फ सुनील कोल पुत्र दशरथ कोल को मार गिराया था. 18 साल बाद अब सोनभद्र की सदर कोतवाली पुलिस ने जुलाई 2025 में शांतिभंग करने के आरोप में पाबंद करते हुए उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय से समन जारी कर दिया. इतना ही नहीं पुलिस ने अपनी जांच में पाया कि मौके पर सुनील पुत्र दशरथ और अन्य से संज्ञेय और असंज्ञेय अपराध होने की संभावना है.
मृतक नक्सली के नाम पर भेज दिया समन
उप जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय से जारी समन मिलने के बाद नक्सली संजय की पत्नी सुषमा हैरान परेशान होकर कोर्ट का चक्कर लगा रही है. सुषमा ने बताया कि जमीनी विवाद को लेकर उसके पति का पुलिस ने 2007 में एनकाउंटर कर दिया था और उसे भी फर्जी मामलों में फंसाकर जेल भेज दिया था. इसमें उसे कोर्ट निर्दोष साबित कर चुकी है. अब माइक्रो फाइनेंस कंपनी की मिलीभगत से उसे और उसके परिवार को फर्जी मुकदमे में फंसाया जा रहा है. इतना ही नहीं पुलिस ने उसके मृतक पति को भी शांतिभंग के मामले में पाबंद किया है. पुलिस की यह कार्रवाई पूरी तरह से गलत है.
पत्नी को भी कई मामलों में फंसाने का आरोप
मामले को लेकर पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज के राष्ट्रीय काउंसिल सदस्य विकास शाक्य ने पत्रकारों से बातचीत की. उन्होंने बताया कि सुनील कोल को हार्डकोर इनामी नक्सली बताकर चंदौली पुलिस ने अप्रैल 2007 में एनकाउंटर कर दिया था, उसके बाद संजय कोल की पत्नी सुषमा कोल को भी कई संदिग्ध मामले में नक्सली बताते हुए विभिन्न मुकदमे में जेल में बंद कर रखा गया. मुकदमे के ट्रायल और न्यायिक कार्रवाई के लंबे प्रक्रिया के वर्षों बाद छूट कर वापस घर आई और अपनी गृहस्थी बसाया. अब पुलिस उसे फंसा रही है।

