फ्लोरोसिस प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से नहीं पहुंचा शुद्ध पानी, डीएम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
जितेंद्र कुमार चंद्रवंशी, दुद्धी, सोनभद्र। नवसृजित विकासखंड कोन अंतर्गत जल जीवन मिशन के तहत संचालित हर्रा-कदरा ग्राम समूह पेयजल योजना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। फ्लोरोसिस प्रभावित क्षेत्रों में भी नियमित शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं होने से रविवार को कुड़वा के टोला पांडुचट्टान में समाजसेवी गंगा प्रसाद यादव की अगुवाई में ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जल निगम और कार्यदायी संस्था के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की महत्वाकांक्षी योजना के बावजूद क्षेत्र के कई गांवों में आज भी नलों से पानी नहीं पहुंच रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर कनेक्शन तो दे दिए गए, लेकिन वर्षों से नलों में एक बूंद पानी नहीं आया। मजबूरन लोग नदी, नाले और चुआं का दूषित पानी पी रहे हैं। इससे फ्लोरोसिस प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों ने कार्यदायी संस्था विष्णु प्रकाश आर पुंगलिया लिमिटेड पर मनमानी और कार्य में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कई ग्राम पंचायतों में नल कनेक्शन का काम अधूरा होने के बावजूद कागजों में कार्य पूर्ण दिखाने का प्रयास किया गया। शिकायतों के बाद कुछ स्थानों पर पाइप ढकने और नल कनेक्शन की मरम्मत का काम शुरू किया गया, लेकिन वह भी अधूरा रह गया।
ग्रामीणों ने पाइपलाइन की गुणवत्ता और बिछाने के मानकों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई जगह डीआई, एचडीपी और एमडीपीई पाइपलाइन निर्धारित गहराई के अनुरूप नहीं बिछाई गई है। हल्की बारिश के बाद भी पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से जलापूर्ति बाधित हो जाती है। ग्रामीणों ने पूरे कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है।
कचनरवा समेत करीब 32 गांव प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार कचनरवा के टोला असनाबांध वार्ड नंबर-3 में वर्षों से जलापूर्ति नहीं हो सकी है। सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बावजूद बिना कार्य पूर्ण हुए जांच आख्या लगाए जाने का आरोप भी ग्रामीणों ने लगाया। कचनरवा, बड़ाप, मधुरी, नरोइयादामर, रोहिनवादामर, बागेसोती, सिंगा, डुबवा, धौरवादामर, सेमरवादामर, गोबरदाहा, डीलवाहा, शिवाखाड़ी, धीचोरवा, बिछमरवा, केवाल, पीपरखाड़, भालुकूदर, गीधिया, ललकीदामर, करैइल, रोरवा, नकतवार, बहुआरा सहित करीब 32 गांवों में जलापूर्ति प्रभावित होने की बात कही गई। ग्रामीणों का कहना है कि टंकी से सटे बड़ाप गांव के लोग भी अब तक कनेक्शन से वंचित हैं। प्रदर्शन में जिला पंचायत सदस्य छविंद्र नाथ, समाजसेवी गंगा यादव, बिहारी प्रसाद यादव और जयराम समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। समाजसेवी गंगा प्रसाद यादव ने कहा कि दूषित पानी पीने से क्षेत्र में फ्लोरोसिस की समस्या गंभीर होती जा रही है। बच्चों के दांत पीले पड़ने और लोगों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ने का दावा करते हुए उन्होंने योजना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मांग की कि प्रभावित गांवों में तत्काल नियमित शुद्ध पेयजल आपूर्ति शुरू कराई जाए तथा लापरवाही बरतने वाली कार्यदायी संस्था के खिलाफ जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
कर्मचारियों के भुगतान को लेकर भी आरोप
ग्रामीणों ने कार्यदायी संस्था के कुछ कर्मचारियों और सुपरवाइजरों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कर्मचारियों को कथित रूप से कम भुगतान किया जा रहा है और कई कर्मचारियों का तीन-तीन महीने का भुगतान लंबित है। भुगतान मांगने पर कर्मचारियों को बाहर किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
जल निगम ने जल्द सुधार का दिया भरोसा
इस संबंध में जल निगम के एई ममूर अली ने बताया कि वर्तमान में करीब 20 से 25 गांवों में जलापूर्ति शुरू हो चुकी है। कुछ स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण समस्या उत्पन्न हुई है। क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को जल्द ठीक कराया जाएगा, जिसके बाद संबंधित क्षेत्रों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। अब सवाल यह है कि जल जीवन मिशन की यह महत्वाकांक्षी योजना फ्लोरोसिस प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों तक कब तक नियमित और शुद्ध पेयजल पहुंचा पाएगी। ग्रामीणों की शिकायतों के बाद विभागीय स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

