(नसीम सिद्दीकी)कोन/सोनभद्र। कोन थाना क्षेत्र में प्रसूता की मौत के मामले में जिलाधिकारी की सख्ती का असर दिखने लगा है। शनिवार को फरार डाक्टर और स्टाफ नर्स के उपर मुकदमा दर्ज किये जाने के बाद आज पुलिस ने डाक्टर और नर्स पर इनाम घोषित कर दिया है। पुलिस ने बताया कि मुकदमा अपराध संख्या 104 बात 26 धारा 105 318, (4) बीएस एवं धारा 34 राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम का मुकदमा पंजीकृत था। डॉक्टर के विरुद्ध 25000 का इनाम एवं नस के खिलाफ 10000 का इनाम घोषित किया गया है। कार्रवाई के बाद लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग में इस तरह की कार्रवाई पहली बार देखने को मिल रहा है और जिलाधिकारी ने जिस तरह से शक्ति दिखाई है उसके बाद न सिर्फ स्वास्थ्य विभाग में हड़काम मचा हुआ है बल्कि पुलिस विभाग की सक्रियता भी तेजी से दिख रही है। आपको बता दें कि सीमा पत्नी देवनारायण, निवासी सोना सिंगा, पोस्ट बागसोडी, थाना कोन, प्रसव हेतु कचनरवा पीएचसी पहुंची थीं। प्राथमिक जांच के उपरांत उन्हें एम्बुलेंस 108 के माध्यम से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोन के लिए रेफर किया गया था, किन्तु एम्बुलेंस के ईएमटी द्वारा मरीज को निर्धारित स्वास्थ्य केन्द्र के स्थान पर बिना पंजीकरण के संचालित ग्लोबल हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया। आरोप है कि अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान महिला की मृत्यु हो गई, जिसके बाद संबंधित चिकित्सक मौके से फरार हो गए। लेकिन यहां बड़ा सवालिया है कि जनपद में अवैध रूप से संचालित अस्पताल किसके इशारे पर व किसके मेहरबानी पर चल रहे हैं। अभी भी कई अस्पताल अवैध रूप से चल रहे हैं जिनकी जांच घटना के बाद ही होगी। आखिर प्रशासन पहले संज्ञान क्यों नहीं लेता। ऐसे में जिलाधिकारी को स्वास्थ्य विभाग में जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ भी बड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि जिम्मेदार अधिकारी Ac रूम से बाहर निकल कर धरातल पर स्थिति से अवगत हो सके और ऐसे अवैध अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई होती रहे।

