चंदौली में 1.30 करोड़ के निर्माणाधीन कंपोजिट विद्यालय का छज्जा गिरा, निर्माण गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता परखे जाने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की उठाई आवाज

चंदौली। बच्चों के सुरक्षित भविष्य की नींव रखने के लिए बनाए जा रहे विद्यालय के निर्माण में ही गुणवत्ता पर सवाल खड़े होने लगे हैं। सदर ब्लॉक के पड़या गांव में करीब 1.30 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन कंपोजिट विद्यालय का छज्जा गिरने का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में चिंता और नाराजगी है। घटना ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल की जा रही सामग्री, तकनीकी मानकों के पालन और संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराकर निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

छज्जा गिरने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल

निर्माणाधीन विद्यालय का छज्जा गिरने की घटना ने सरकारी धन से कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब विद्यालय के निर्माण पर लगभग 1.30 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो इसमें निर्धारित मानकों, तकनीकी नियमों और सुरक्षा संबंधी प्रावधानों का पूरी गंभीरता से पालन होना चाहिए।

विद्यालय का निर्माण बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से सीधे जुड़ा है। ऐसे में निर्माण के दौरान किसी हिस्से का गिरना सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जरूरी है कि मामले की तकनीकी विशेषज्ञों से जांच कराई जाए और छज्जा गिरने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जाए।

निर्माण सामग्री से लेकर तकनीकी मानकों तक हो जांच

ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में विशेषज्ञों की टीम गठित कर निर्माणाधीन विद्यालय का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। जांच के दौरान इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री, सीमेंट, बालू, गिट्टी, सरिया, कंक्रीट की गुणवत्ता और निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया की पड़ताल की जानी चाहिए।

इसके साथ ही स्वीकृत नक्शे, निर्माण की निर्धारित डिजाइन, तकनीकी मानकों और कार्य की गुणवत्ता से जुड़े अभिलेखों का भी सत्यापन किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर निर्माण सामग्री और संरचना के नमूनों की प्रयोगशाला में जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जा रहा था या नहीं।

दोषियों की जिम्मेदारी तय कर हो कार्रवाई

ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच में यदि निर्माण कार्य में अनियमितता, घटिया सामग्री के इस्तेमाल, तकनीकी मानकों की अनदेखी अथवा किसी स्तर पर लापरवाही की पुष्टि होती है, तो संबंधित ठेकेदार, कार्यदायी संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका निर्धारित की जाए। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

साथ ही, यदि जांच में निर्माण कार्य में कमी सामने आती है, तो उसकी मरम्मत या पुनर्निर्माण केवल औपचारिकता के तौर पर न कराया जाए, बल्कि तकनीकी विशेषज्ञों की देखरेख में गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। इससे सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग पर अंकुश लगाने के साथ बच्चों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।

बच्चों की सुरक्षा से नहीं होना चाहिए समझौता

विद्यालय शिक्षा का केंद्र होने के साथ बच्चों की सुरक्षा का महत्वपूर्ण स्थान भी है। इसलिए निर्माण कार्य पूरा होने से पहले भवन की मजबूती और सुरक्षा का तकनीकी सत्यापन जरूरी है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते गुणवत्ता संबंधी कमियों की पहचान और सुधार किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।

फिलहाल, छज्जा गिरने के वास्तविक कारणों, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और किसी संभावित अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और निर्माण की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों की जवाबदेही तय करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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