बोले- “रोजी-रोटी और भोजन की आजादी पर हमला बर्दाश्त नहीं”
संवाददाता : ज्ञानेश दुबे
वाराणसी। नगर निगम के उस प्रस्ताव के खिलाफ व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का विरोध तेज हो गया है, जिसमें शहर के भीतर संचालित मांस, मछली और पोल्ट्री की दुकानों को 8 से 10 किलोमीटर दूर स्थानांतरित करने की बात कही गई है। विरोध जताते हुए व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने नगर निगम को ज्ञापन सौंपकर प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की।
हजारों परिवारों के सामने रोजगार का संकट
व्यापारियों का कहना है कि प्रस्ताव लागू होने से शहर के हजारों छोटे दुकानदारों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। उनका कहना है कि अधिकांश दुकानदार गरीब एवं मध्यम वर्ग से आते हैं और पीढ़ियों से इसी व्यवसाय पर निर्भर हैं। शहर से बाहर दुकानें शिफ्ट होने पर फुटकर ग्राहकों की संख्या में भारी कमी आएगी, जिससे कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा।
संविधान का हवाला देकर जताया विरोध
ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) का उल्लेख करते हुए कहा गया कि प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का व्यवसाय करने की स्वतंत्रता प्राप्त है। वहीं अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को अपनी पसंद का भोजन चुनने का भी अधिकार है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यदि मांस और मछली की दुकानें शहर से बाहर कर दी गईं तो उपभोक्ताओं को भी अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
बिना संवाद के फैसला लेने का आरोप
व्यापारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इतने महत्वपूर्ण निर्णय से पहले संबंधित व्यापारियों और उपभोक्ताओं से कोई चर्चा नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि खुली कटाई और स्वच्छता को लेकर समस्या है तो नगर निगम आधुनिक बंद दुकानों, रंगीन शीशों, रेफ्रिजरेशन व्यवस्था और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि होटल, रेस्तरां, मॉल और ऑनलाइन माध्यमों से बिक्री जारी रखने की अनुमति देना, जबकि छोटे व्यापारियों पर रोक लगाना, दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
प्रमुख मांगें
मांस, मछली एवं पोल्ट्री दुकानों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के प्रस्ताव को तत्काल निरस्त किया जाए।
स्वच्छता और संचालन संबंधी नियम सभी व्यापारियों पर समान रूप से लागू किए जाएं।
आधुनिक सुविधाओं के साथ व्यवस्थित एवं स्वच्छ व्यापारिक व्यवस्था विकसित की जाए।
किसी भी निर्णय से पहले व्यापारियों और उपभोक्ताओं से व्यापक संवाद किया जाए।
व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

