प्रातःकाल उठकर रघुनाथा , मातु पिता गुरु नावहिं माथा

राज राजेश्वरी महा शक्ति पीठ चक्रसुदर्शनपूरी प्रयाग में गुरू पूर्णिमा का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

(राहुल गुप्ता)हंडिया,प्रयागराज। गुरू पूर्णिमा के पावन पर्व पर राज राजेश्वरी महा शक्ति पीठ चक्रसुदर्शनपूरी प्रयाग में गुरू पूर्णिमा का पर्व बड़े धूम-धाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया ।इस अवसर पर शिष्यों ने श्रध्दा सुमन श्री श्री 1008 जगतगुरु हरिप्रपन्नाचार्य जी ऊर्फ हरिहरानंद महाराज को भेंट करके गुरु मन्त्र और आशीर्वाद लिया।इस अवसर पर महाराज ने गुरू पूर्णिमा के बारे में विस्तार से बताया ।कि सबसे पहले देवताओं ने गुरू बृहस्पति की पुजा करके शुरुआत की थी । दुसरा आज के दिन वेद ब्यास जी ने वेदों का प्रचार प्रसार शुरू किया था । गुरू पूर्णिमा के दिन गुरू का पुजन अर्चन के बाद गुरू द्वारा बताए गए मार्गों पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। मनुष्य दक्षिणा के रूप मे मनुष्य सांसारिक चीजों का क्या दे सकता है । गुरू की असली दक्षिणा वह होती है जो शिष्य गुरु के बताए हुए मार्ग पर चलकर धर्म के प्रचार प्रसार में लग जाय यहि गुरू की असली दक्षिणा होगी । सभी भक्तों को प्रतिदिन सीता राम सीताराम का जाप अवश्य करना चाहिए ।और प्रातःकाल उठकर बिस्तर से जमीन पर पैर रखने से पहले माता-पिता और गुरू को अवश्य प्रणाम करना चाहिए। इसको परमात्मा राम भी करते थे । प्रातःकाल उठकर रघुनाथा ,मातु पिता गुरु नावहिं माथा भगवान राम ने भी गुरू के शरण में जाकर शिक्षा ली थी ।बिना गुरू के आज्ञा के बिना कोई कार्य भी नहीं करते थे । इसलिए सभी को गुरू के शरण में अवश्य जाना चाहिए।और गुरू के बताए हुए मार्ग पर चलकर अपना जीवन यापन करते रहना चाहिए। कोई भी कार्य करें गुरू और परमात्मा को समर्पित होकर करें । अवश्य ही सफलता मिलेगी। अन्त में महराज जी ने सबको गुरू पूर्णिमा की हार्दिक बधाई दी और सुखमय , स्वस्थ जीवन जीने का आशीर्वाद दिया । सनातन धर्म की , शास्त्र की हमेशा अपने जीवन में उतारें यही आज की मेरी असली दक्षिणा होगी ।।दुर दुर से भक्त आशीर्वाद लेने आए थे । बलिया, बनारस , मीरजापुर,और प्रयागराज से सैंकड़ों की संख्या में पधारे थे। भब्य भण्डारे का भी आयोजन किया गया था।भजन कीर्तन भी अच्छे कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया।छोटा सा मन्दिर बनाएंगे राम गुण गाएंगे ।लल्लन शुक्ला ने गुरू बन्दना गाया कि गुरु तेरे बिना कोई न सहारा बिन तेरे भजन गाकर खुब आनन्दित किया ।भक्तों ने खुब आनन्द लिया।

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