10-12 माह से मानदेय बकाया, सपा नेता विवेक सिंह ने मनरेगा सेल में व्याप्त भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच की मांग की
वर्षों से एक ही ब्लॉक में जमे एपीओ और कंप्यूटर ऑपरेटरों के स्थानांतरण की उठी आवाज
(रँगेश सिंह)सोनभद्र। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्राम पंचायतों में कार्यरत ग्राम रोजगार सेवकों की समस्याओं को लेकर समाजवादी लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय सचिव विवेक सिंह पटेल के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात की। इस दौरान छह सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपकर रोजगार सेवकों के बकाया मानदेय भुगतान और मनरेगा सेल में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच की मांग की गई।
मानदेय न मिलने से भुखमरी की कगार पर परिवार
समाजवादी नेता विवेक सिंह ‘किसान का बेटा’ ने प्रशासन को घेरते हुए कहा कि जनपद में ग्राम रोजगार सेवक पिछले 10 से 12 महीनों से मानदेय न मिलने के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश भर में कई रोजगार सेवक इलाज के अभाव और गरीबी के कारण आत्महत्या करने पर मजबूर हुए हैं, जिसके लिए सीधे तौर पर योगी सरकार और विभाग के तानाशाह अधिकारी जिम्मेदार हैं।
मनरेगा सेल में ‘भ्रष्टाचार’ का बोलबाला
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि विभिन्न विकास खंडों के मनरेगा सेल में एपीओ, लेखा सहायक और कंप्यूटर ऑपरेटर वर्षों से एक ही पटल पर ‘कुंडली’ मारकर बैठे हैं। सप्लायरों से सांठ-गांठ कर पेट्रोल, डीजल, स्टेशनरी और फर्नीचर खरीद के नाम पर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। विवेक सिंह ने मांग की कि पिछले पांच वर्षों में प्रशासनिक मद में हुए व्यय की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और लंबे समय से जमे कर्मचारियों का तत्काल स्थानांतरण किया जाए।
EPF और दंड का मुद्दा
विभागीय लापरवाही के कारण रोजगार सेवकों के यूएएन (UAN) खाते में ईपीएफ की धनराशि समय पर जमा नहीं हुई। अब ईपीएफ विभाग द्वारा अर्थदंड (पेनाल्टी) मांगा जा रहा है। सपा प्रतिनिधिमंडल ने सवाल उठाया कि अधिकारियों की गलती का खामियाजा गरीब रोजगार सेवक क्यों भुगतें?
आंदोलन की चेतावनी
विवेक सिंह पटेल ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि मानदेय भुगतान की विसंगतियां दूर नहीं की गईं और संविदा कर्मचारियों का शोषण बंद नहीं हुआ, तो वे इस पूरे प्रकरण से सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव को अवगत कराएंगे और सोनभद्र से एक बड़ा जनांदोलन शुरू करेंगे।
इस अवसर पर महिला जिला अध्यक्ष गीता गौर, युवा नेता दुबे, कृष्ण यादव, सुशील कुमार, प्रमोद सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता व पदाधिकारी उपस्थित रहे।मुख्य मांगें एक नजर में: लंबित 12 माह के मानदेय का तत्काल एकमुश्त भुगतान। मनरेगा प्रशासनिक मद के 5 वर्षों के खर्च की उच्च स्तरीय जांच। वर्षों से जमे एपीओ, लेखा सहायक व ऑपरेटरों का तबादला। ईपीएफ की धनराशि विलंब शुल्क के साथ जमा करना। सप्लायरों के साथ मिलकर की जा रही वित्तीय अनियमितता पर रोक।

