आजादी के 78 साल बाद भी अंधेरे में ‘कोटा’, बिजली के लिए आदिवासियों ने फूंका बिगुल

चोपन (सोनभद्र)रँगेश सिंह)। ऊर्जा की राजधानी कहे जाने वाले जनपद सोनभद्र में आज भी कई इलाके ऐसे हैं जहाँ ‘चिराग तले अंधेरा’ वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। चोपन ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोटा अंतर्गत तेलगुड़वा (पश्चिम टोला) में आजादी के बाद से अब तक बिजली न पहुँचने पर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। रविवार को अपना दल (एस) छात्र मंच के पूर्व प्रदेश सचिव रविन्द्र सिंह यादव के नेतृत्व में आदिवासियों ने जोरदार आंदोलन कर प्रशासन के खिलाफ हुंकार भरी।


ओबरा से बिजली जा रही बाहर, पर हम क्यों हैं अंधियारे में?”


आंदोलन को संबोधित करते हुए रविन्द्र सिंह यादव ने कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि पास ही स्थित ओबरा थर्मल पावर प्लांट से बिजली बनकर पूरे देश को रोशन कर रही है, लेकिन यहाँ के आदिवासी सिर्फ उस प्लांट का प्रदूषण झेल रहे हैं। प्रदूषण के कारण ग्रामीण बीमार हो रहे हैं, फिर भी उन्हें मूलभूत बिजली तक मयस्सर नहीं है।


जनप्रतिनिधियों पर साधा निशाना


आंदोलनकारियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। श्री यादव ने कहा, “समाज कल्याण राज्य मंत्री का आवास यहाँ से मात्र 5 किलोमीटर दूर है। विधायक और जिले के आला अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन सोनभद्र से लेकर लखनऊ तक जाएगा।
सरकार की मंशा पर अधिकारियों ने फेरा पानी
पंकज यादव ने कहा कि आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय और शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुँचनी चाहिए, लेकिन अधिकारी इसमें बाधक बन रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सरकार की छवि खराब नहीं होने देंगे, बल्कि जनता के हक के लिए पटल पर संघर्ष जारी रखेंगे।
आंदोलन में ये रहे मौजूद इस मौके पर भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से विजय कुमार, तेजू राम, वंशराज, गुड्डू, लालमन, बली राम, ब्रिज देव मुनि, ओमप्रकाश, भोला, झीगई, उत्तम, मुन्ना, छोटेलाल, रामविलास, शिवकुमार, लालजी, सोनू गुप्ता, सुरेश, मोहन, लाल चंद्र, रामप्यारी, विश्वनाथ, लक्ष्मण, संतोष, रोपड़, रमेश और सेनापति सहित दर्जनों आदिवासी शामिल थे। मुख्य बिंदु: स्थान: तेलगुड़वा (पश्चिम टोला), ग्राम पंचायत कोटा, चोपन, समस्या: आजादी के बाद से बिजली का अभाव, चेतावनी: समाधान न होने पर लखनऊ तक कूच करने का अल्टीमेटम।

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