(ऋषभ सिंह)ओबरा/सोनभद्र: उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा झरिया गांव में आयोजित एक जनसुनवाई उस समय विरोध का केंद्र बन गई, जब बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों, आदिवासियों और वनवासियों ने पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली परियोजनाओं का पुरजोर विरोध किया।
प्रकृति और जलस्रोत बचाने के लिए एकजुट हुआ जनसमूह
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उत्तरी क्षेत्र में बची हुई एकमात्र चट्टानों, प्राकृतिक रूप से उगे सघन वनों और महत्वपूर्ण जलस्रोतों को नष्ट करने की योजना पर वे किसी भी स्थिति में सहमति नहीं देंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जनसुनवाई में सहमति देने के बजाय उन्होंने इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि बोर्ड के अधिकारियों ने कुछ भोले-भाले लोगों को गुमराह कर रजिस्ट्रेशन के नाम पर उनसे हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए हैं, जिसे वे पूरी तरह अवैध मानते हैं।

“प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपना काम नहीं कर रहा”
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर देश का विकास कैसे होगा जब जिम्मेदार विभाग ही ‘रास्ते से हटकर’ काम करेंगे। प्रदर्शनकारियों ने कहा, “प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का प्राथमिक कार्य पर्यावरण को बचाना, कंपनियों, वाहनों और फैक्ट्रियों से फैलने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना और जन-जागरूकता फैलाना है, न कि प्राकृतिक संपदा को नष्ट करने वाली परियोजनाओं को बढ़ावा देना।”

सोन नदी के प्रदूषण से त्रस्त हैं दर्जनों गांव
ग्रामीणों ने वर्तमान में झेल रहे प्रदूषण के दंश को उजागर करते हुए बताया कि झरिया, चकरिया, सल्टगवां, बरहमोरी, ससनई, महुला, छिड़का, कनच कन्हौरा, पकरिहवा, कोडईल, पटवन, सोनाटोला, लालगंज, सलखन रुदौली, बेलच, मकरी बारी, नौडीहा, हर्रा, बेलौरा, खोखा और करहिया सहित सोन नदी के दोनों किनारों पर बसे दर्जनों गांव पहले से ही ओबरा पावर प्लांट के प्रदूषण की मार झेल रहे हैं।
आरोप है कि पावर प्लांट की जहरीली राख (Fly Ash) खुलेआम सोन नदी में प्रवाहित की जा रही है। इसके कारण:
- स्वास्थ्य संकट: लाखों लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं।
- पर्यावरणीय क्षति: करोड़ों लोग प्रभावित हो रहे हैं और जलीय जीव-जंतु असमय काल के गाल में समा रहे हैं।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि नई परियोजनाओं को मंजूरी देने से पहले बोर्ड को ओबरा पावर प्लांट द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण पर सख्ती से रोक लगानी चाहिए। प्रदर्शन में शामिल आदिवासियों, वनवासियों और ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जल, जंगल और जमीन को उजड़ने नहीं देंगे। इस जनसुनवाई के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी है।

