जन्मदिन की स्मृति में चिकित्सक, समाजसेविका को किया भावपूर्ण नमन,
जितेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी दुद्धी सोनभद्र। तहसील अन्तर्गत म्योरपुर ब्लॉक के गोविंदपुर स्थित बनवासी सेवा आश्रम की मंत्री एवं महान समाज सेविका डॉ. रागिनी प्रेम के 92वें जन्मदिन की स्मृति में शनिवार को उनके सेवा और समर्पण को याद किया गया। प्रेरणा स्थल पर सर्व धर्म प्रार्थना और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत किया गया वक्ताओं ने कहा कि डॉ. रागिनी प्रेम ने सोनांचल के दूरस्थ आदिवासी और ग्रामीण समाज में स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वावलंबन और सामाजिक जागरूकता की मजबूत नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विमल सिंह, जगत नारायण विश्वकर्मा, देव कुमारी, माया सिंह, नीरा, केवला दुबे आदि ने कहा कि डॉ. रागिनी प्रेम का जीवन समाज के अंतिम व्यक्ति की सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने आदिवासी महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता और शिक्षा के साथ ग्रामीण महिलाओं की सामाजिक एवं आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने का निरंतर प्रयास किया। उनका मानना था कि महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़े बिना ग्रामीण समाज का वास्तविक विकास संभव नहीं है।

वक्ताओं ने कहा कि डॉ. रागिनी प्रेम ने चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग सुविधापूर्ण जीवन के लिए न कर दूरस्थ वनवासी क्षेत्रों के जरूरतमंद लोगों की सेवा में किया। 1968 में जीवनसाथी कर्मयोगी प्रेम भाई के साथ बनवासी सेवा आश्रम की स्थापना के बाद उन्होंने गांव-गांव स्वास्थ्य जागरूकता, टीकाकरण, परिवार नियोजन और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित कर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की पहल भी की।
महिलाओं और युवाओं को बनाया बदलाव का माध्यम
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. रागिनी प्रेम ने महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि समाज के विकास की सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया। साबुन निर्माण, कागज निर्माण और मधुमक्खी पालन जैसे कुटीर उद्योगों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्वावलंबन की राह दिखाई। वहीं युवाओं के व्यक्तित्व विकास, शिक्षा और सामाजिक चेतना को बढ़ावा देने के लिए भी लगातार कार्य किया।
उन्होंने कहा कि डॉ. रागिनी प्रेम की सोच थी कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति और समाज के व्यक्तित्व निर्माण का आधार है। इसी विचार से आश्रम के माध्यम से ग्रामीण बच्चों, युवाओं और महिलाओं को शिक्षा, प्रशिक्षण तथा सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का काम आगे बढ़ा।
सेवा और करुणा की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. रागिनी प्रेम का जीवन आज भी सोनांचल के लोगों के लिए प्रेरणा है। स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, स्वावलंबन और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके प्रयासों ने इस क्षेत्र में बदलाव की आधारशिला रखी। उनके आदर्शों को आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
डॉ. रागिनी प्रेम का जन्म 10 सितंबर 1934 को हुआ था। उन्होंने 1957 में एमबीबीएस तथा 1964 में उस्मानिया विश्वविद्यालय से एमडी की शिक्षा प्राप्त की। उनके सेवा-कार्य को याद करते हुए उपस्थित लोगों ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की और समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा की भावना पहुंचाने का संकल्प लिया। मौके पर डॉ विभा,शुभा प्रेम,नेहा सिंह,सुरेश,देवनाथ सिंह, इंदु, गीता, प्रदीप पांडेय, बृजेश सरोज, नीता,मुलायम सिंह,आदि उपस्थित रहे। संचालन शिव शरण ने किया।

