बभनी/सोनभद्र (अरुण पांडेय)
बभनी(सोनभद्र)।म्योरपुर विकास खंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत राजा सरई में विकास के बड़े-बड़े दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। गांव की मुख्य जीवनरेखा मानी जाने वाली लगभग चार किलोमीटर लंबी तीन प्रमुख सड़कें बीते लंबे समय से बदहाली और उपेक्षा का शिकार हैं। देखरेख के अभाव में ये सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं और अब सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क, यह पहचानना मुश्किल हो गया है। सड़कों की स्थिति इतनी दयनीय है कि कई जगहों से सोलिंग (ईंट-पत्थर) तक उखड़कर गायब हो चुकी है।
कीचड़ और जलजमाव से थम जाता है जिंदगी का पहिया।
बरसात के दिनों में इस क्षेत्र के ग्रामीणों की परेशानियां दोगुनी हो जाती हैं। हल्की सी बारिश होते ही पूरी सड़क जलमग्न हो जाती है और जगह-जगह कीचड़ का साम्राज्य कायम हो जाता है। इसके चलते गांव का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाता है। आए दिन राहगीर व दुपहिया वाहन चालक इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। बुजुर्गों, मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में ग्रामीणों को लोहे के चने चबाने पड़ते हैं।

प्रधान के नेतृत्व में ग्रामीणों का जोरदार प्रदर्शन।
गांव की इस विकराल समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। ग्राम प्रधान संतोष कुमार खुद मैदान में उतरे और उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर शासन-प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए सड़क की तत्काल मरम्मत और पक्की सड़क निर्माण कराने की मांग की। इस जनसमस्या और ग्रामीणों के संघर्ष को समाचार पत्र ‘अहिंसा एक्सप्रेस’ में प्रमुखता के साथ प्रकाशित भी किया गया है, ताकि सोए हुए प्रशासनिक अमले की नींद खुल सके।
नौनिहालों ने पूछा -“क्या यही है हमारे देश का उज्जवल भविष्य?”
प्रशासनिक उदासीनता का सबसे मार्मिक पहलू तब देखने को मिला जब पढ़ने पहुंचे छोटे-छोटे मासूम बच्चे नव निहाल भी इस व्यवस्था से आहत दिखे। हाथों में बसता लिए स्कूली बच्चों ने विद्यालय के मुख्य द्वार पर खड़े होकर शासन प्रशासन की नियत पर गंभीर सवाल उठाए।
मासूमो ने भारी मन से पूछा-
आखिर कब बनेगी हमारी गांव की सड़कें?
कब पहुंचेगी हमारे गांव तक असली विकास?
“क्या कीचड़ और गुड्डू से होकर स्कूल जाना ही हमारे देश का उज्जवल भविष्य है?”
मासूम बच्चों के इन सवालों ने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को कट करें में खड़ा की कर दिया है बल्कि जल प्रतिनिधियों के बड़े-बड़े दावों के हवा निकलती है ग्रामीण और बच्चों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द यह सड़क का निर्माण शुरू नहीं कराया गया तो वह उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

