(अरुण पांडेय)
जी रामजी योजना में बाल श्रम का आरोप, जांच शुरू।
जी रामजी योजना के कार्यों में लगे नाबालिग बच्चे: रंदा गांव से सामने आया मामला, प्रधान व सचिव की भूमिका पर उठे सवाल।
निर्माण कार्य में बाल श्रम के आरोपों से हड़कंप, मनरेगा एपीओ बोले— जांच के बाद होगी सख्त कार्रवाई।
सोनभद्र (बभनी)। विकासखंड बभनी के रंदह गांव में ‘जी राम जी योजना’ के तहत चल रहे निर्माण कार्य में करीब आधा दर्ज नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। ग्रामीणों ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव की कार्यशैली व भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
कलम की उम्र में थमाए गए फावड़ा और फरसा।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन बच्चों की उम्र स्कूल जाकर पढ़ने-लिखने की है, उनके हाथों में किताबें छोड़कर फावड़ा और फरसा थमा दिया गया है। बच्चों से नियमित रूप से वयस्क मजदूरों की तरह काम लिया जा रहा है, जो सीधे तौर पर बच्चों के अधिकारों का हनन है। मामला सामने आने के बाद सरकारी योजनाओं के पारदर्शी क्रियान्वयन और बाल अधिकारों के संरक्षण को लेकर कई तरह के प्रश्न उठने लगे हैं।
जिला प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग।
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर उनकी शिक्षा सुनिश्चित की जाए।
जांच के बाद होगी नियमानुसार कार्रवाई: (मनरेगा एपीओ)
इस संबंध में मनरेगा के एपीओ पंकज कुमार ने बताया, “मामले की जानकारी मिली है और इसकी जांच कराई जा रही है। जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमों अनुसार सख्त कार्यवाही की जाएगी।
फिलहाल आरोपी के आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी लेकिन इस घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासनिक जांच वह आने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

