मुंबई सर्वोदय मंडल ने बदला जीवन जीने का उद्देश्य
भोपालः पर्यावरण संस्कृति संरक्षण एवं मानव कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने आज भोपाल प्रवास के दौरान लक्ष्मण गोले से मुलाकात की । लक्ष्मण गोले से मुलाकात कर एक गैंगस्टर से समाज सुधारक प्रेरक बनने तक की यात्रा के बारे में चर्चा की। आपसे भोपाल संभाग और आसपास के जिले के विद्यालयों, कॉलेज एवं जेलों में समाज को सही दिशा मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु ट्रस्ट के साथ कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में सम्मिलित होने के लिए आग्रह किया।

लक्ष्मण गोले ने परिचर्चा के दौरान उन्होंने अपने अतीत के अपराधिक इतिहास के बारे में बताया कि क्षणिक क्रोध के कारण हिंसा कर जेल जाने और जेल से बाहर आने पर गलत लोगों की संगत में पड़कर कैसे वह रातों रात गैंगस्टर बन गए थे।
2004 में, मुंबई के कुर्ला इलाके में मारपीट और जबरन वसूली सहित 19 अपराधों के लिए चार साल से ज़्यादा की सज़ा मुझे सुनाई गई थी।
मैने बचपन में सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, मगर जेल आने के बाद धीरे धीरे खाली समय में मेरी रुचि अध्ययन और आत्म चिंतन की ओर बढ़ गई, जेल में मैंने गुजराती , उर्दू ,अंग्रेजी भाषा पढ़ना सीखा, मैंने अपने जीवन में समय प्रबंधन जेल के अंदर ही सीखा,जेल मेरे लिए सुधार ग्रह बन गया था।

इंसान चाहे तो कभी भी बदल सकता है, उसे दूसरा मौका जरूर मिलता है, बस उसे सही दिशा में कदम उठाने की जरूरत है,इसी संदर्भ एक समय में सातवीं कक्षा तक शिक्षित अपने क्रूर अपराधों के लिए जाने जाने वाले लक्ष्मण गोले ने एक किताब की शक्ति से जेल में अपने जीवन को बदल दिया, किताब थी,सत्य के साथ मेरे प्रयोग, मुझे यह किताब एक पोस्टकार्ड पर मुम्बई सर्वोदय मंडल द्वारा कोरियर से निशुल्क प्राप्त हो गई। महात्मा गांधी की पुस्तक को पढ़ना मेरी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट रहा। मेरा जीवन गांधी के मौलिक सिद्धांत सत्य,अहिंसा, अपरिग्रह, आत्मनिर्भरता से जुड़ गया। मैने जेल में साथी कैदियों की सकारात्मक, यथार्थ रूप से मदद करना शुरू कर दी।यहां से मेरे परिवर्तन एवम सुधार की चर्चा जेल से बाहर भी जगह जगह होने लगी, इस ही संदर्भ में जेल से छुटने के बाद फिर एक दिन मुझे पुणे के योगेश वाघाणी का फोन आया, जिन्होंने उन्हें अपनी फर्म वेदजेन में नौकरी का प्रस्ताव दिया, जो कि कायझेन मैनेजमेंट ( उच्च उत्पादकता , कामगार उन्नति) कंसल्टेंसी फर्म है। मुझे जेल से रिहा होने के बाद यहां नौकरी मिल गई,मेरे शानदार काम को देखते हुए मुझे छह महीने की काइज़न ट्रेनिंग देने के लिए तीन-चार और कंपनियों में अन्य टीमों के साथ भेजा गया। कुछ साल फर्म में कैज़ेन कंसल्टेंट के रूप में काम किया।
सुशील कुमार जैन ने बताया कि गोले अभी तक सैकड़ो स्कूल, कॉलेज, लॉ कॉलेज में मानद सहायक शिक्षक के रूप में व्याख्यान दे चुके है,जेल में अपने जीवन के कटु अनुभव को कैसे सकारात्मकता में बदला बता चुके हैं। जेल में रहते हुए सभी साथी कैदियों को प्राप्त चार्जशीट आपने बार बार पढ़ सारी धाराएं याद कर अपनी डायरी में लिख ली, साथी कैदियों को कोई भी आवेदन जैसे वकील प्राप्ति हेतु, मेडिकल हेतु, अपील हेतु आदि विषय में बनवाना होता तो एक वकील की तरह मिनटों में बिना फीस या लाभ के आवेदन तैयार कर देते थे ,जिससे जेल में भी सब कैदी आपका सम्मान करते थे।
लक्ष्मण गोले द्वारा जेल से रिहा हुए कैदियों को सामाजिक बहिष्कार होने की दशा में उनका मार्गदर्शन कर उनको संबल प्रदान कर स्थापित कर चुके है,लक्ष्मण गोले की गैंग के पांच पुराने साथी आज उनसे प्रेरणा पाकर व्यवस्थित सामाजिक जीवन जी रहे हैं।
कर्नाटक प्रांत के कई जिलों की लाइब्रेरी में आपके जीवन पर लिखी गई किताबें उपलब्ध है, आपके जीवन पर कई नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए गए, सोनी इंटरटेनमेंट चैनल द्वारा गुनाहों के जख्म नाम से आपके जीवन परिवर्तन के ऊपर एक टी वी एपिसोड भी प्रसारित हो चुका है। आईबीएन 7 पर जिंदगी लाइव नेशनल अवार्ड और 1 लाख का चेक मिला भी आपको मिला , स्टेज पर ही वह चेक आपने मुंबई सर्वोदय मंडल को मंडल द्वारा उन पर किए गए उपकार स्वरूप मानव कल्याण के लिए मंडल को भेंट कर दिया।
लक्ष्मण गोले ओंकारेश्वर से साढ़े महीना तक मौन व्रत धारण कर लगभग 3100 किलो मीटर की नर्मदा परिक्रमा पद यात्रा द्वारा पूर्ण कर चुके है , इसके अतिरिक्त ऋषिकेश से पद यात्रा द्वारा केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री आदि पवित्र तीर्थों की वंदना भी की श्रद्धा पूर्वक पूर्ण की। 2024 केदारनाथ यात्रा में भारी बारिश और बिजली गिरने से सैकड़ों लोगों की जान चली गई और सभी मार्ग अवरुद्ध हो गए , हेलीकॉप्टर से यात्रा पर फंसे लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया जा रहा था, पर लक्ष्मण गोले ने हेलीकॉप्टर से जाने से मना कर दिया बल्कि खच्चर वालो के साथ रास्ते भर दूसरे यात्रीयो की मदद करते हुए पहाड़ों पर ट्रैकिंग करते हुए सुरक्षित नीचे पहुंचे ।
मुंबई सर्वोदय मंडल से जुड़ कर 16 सालों से देश भर के स्कूल कॉलेज और जेलों में जाकर गांधी विचार प्रचार करते है,आज भी लक्ष्मण गोले कड़ी मेहनत के दम पर आगे बढ़ने के लिए दृढ़ संकल्पित है ,दिन रात समाज सुधार के कार्यों के लिए तत्पर हैं । अभी लक्ष्मण गोले को फोन पर जानकारी मिली कि उनकी दोनों बेटियों की सम्पूर्ण शिक्षा बंगलौर स्थित सत्य साईं बाबा ट्रस्ट द्वारा पूर्ण की जावेगी । लक्ष्मण गोले हमेशा सब से कहते हैं मराठी में एक कहावत है वाचाल तर वाचाल , इसका हिंदी मे अनुवाद है, पढ़ोगे तो बचोगे।

