फर्जी खनिज परमिट बनाकर चल रहा था करोड़ों का खेल, पुलिस ने गिरोह का किया भंडाफोड़


रॉबर्ट्सगंज पुलिस की बड़ी कार्रवाई, पांच आरोपी गिरफ्तार; लैपटॉप, प्रिंटर और 748 सिक्योरिटी पेपर बरामद, तीन मास्टरमाइंड फरार


(अशोक कुमार सिंह)सोनभद्र। अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सोनभद्र पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। रॉबर्ट्सगंज पुलिस ने फर्जी ई-फॉर्म C/MM-11 (खनिज परिवहन परमिट) तैयार कर गिट्टी के अवैध परिवहन का संगठित रैकेट चलाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान फर्जी परमिट तैयार करने में प्रयुक्त लैपटॉप, प्रिंटर, सैकड़ों सिक्योरिटी पेपर और बड़ी संख्या में पुराने ई-फॉर्म बरामद किए गए हैं। मामले में तीन मुख्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार तथा क्षेत्राधिकारी नगर रणधीर मिश्रा के पर्यवेक्षण में प्रभारी निरीक्षक रामस्वरूप वर्मा, एसओजी टीम और खनन विभाग की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की।
पुराने परमिटों में बदलाव कर तैयार किए जाते थे फर्जी दस्तावेज
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह पुराने इस्तेमाल किए गए ई-फॉर्म C/MM-11 में वाहन संख्या, तारीख, समय और अन्य विवरण बदलकर उन्हें नए परमिट का स्वरूप देता था। इन्हीं फर्जी परमिटों के सहारे बिल्ली-मारकुंडी क्षेत्र से गिट्टी का अवैध परिवहन कराया जाता था।
मामले का खुलासा वाहन चालक दिलीप प्रजापति की गिरफ्तारी के बाद हुआ। पूछताछ में उसने पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए बताया कि AK इंटरप्राइजेज के कार्यालय में लैपटॉप और प्रिंटर की मदद से फर्जी परमिट तैयार किए जाते थे। कार्यालय पर छापेमारी, भारी मात्रा में फर्जी सामग्री बरामद दिलीप की निशानदेही पर पुलिस ने AK इंटरप्राइजेज, बिल्ली-मारकुंडी स्थित कार्यालय पर छापा मारकर चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। मौके से एक Dell लैपटॉप, HP LaserJet Pro प्रिंटर, 748 अप्रयुक्त सिक्योरिटी पेपर, करीब 1000 पुराने प्रयुक्त ई-फॉर्म C/MM-11 तथा फर्जी परमिट बनाने से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए।

लाइसेंस समाप्त होने के बाद भी जारी था फर्जीवाड़ा


जांच में यह भी खुलासा हुआ कि AK इंटरप्राइजेज का लाइसेंस 8 जून 2026 को समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद कंपनी के नाम पर जारी सिक्योरिटी पेपर और पुराने परमिटों का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे और उन्हीं के आधार पर खनिजों का अवैध परिवहन कराया जा रहा था।


तीन मुख्य आरोपी फरार


पुलिस ने मामले में चालक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि गिरोह के कथित सरगना अश्वनी कुमार पटेल, हिमांशु पाण्डेय तथा AK इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर सुरेश कुमार पाठक अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
पुलिस का कहना है कि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अवैध खनन और खनिज परिवहन के खिलाफ अभियान आगे भी सख्ती से जारी रहेगा।

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