एबीबील और कागजात के नाम पर लाखों के चालान, फिर भी कथित अवैध वसूली से परेशान मालवाहक वाहन मालिक और व्यापारी
नौबतपुर (चंदौली)मदन मोहन। नौबतपुर में सेलटैक्स विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मालवाहक वाहनों के एबीबील और अन्य जरूरी कागजातों के नाम पर लाखों रुपये के चालान काटे जाने के बाद भी कथित तौर पर वाहनों को छोड़ने के नाम पर अतिरिक्त रकम मांगे जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
सूत्रों के अनुसार, मालवाहक वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान व्यापारियों पर भारी-भरकम चालान लगाए जा रहे हैं। व्यापारी नियमानुसार चालान की राशि जमा करने के बाद जब अपने वाहनों को छुड़ाने पहुंचते हैं, तो कथित तौर पर उन्हें एक और परेशानी का सामना करना पड़ता है। आरोप है कि कुछ कर्मचारी वाहन छोड़ने के नाम पर प्रति गाड़ी पांच हजार से दस हजार रुपये तक की अतिरिक्त रकम मांगते हैं। रकम नहीं देने पर वाहन छोड़ने में आनाकानी किए जाने का भी आरोप लगाया जा रहा है।
चालान जमा करने के बाद भी राहत नहीं, व्यापारियों में नाराजगी
व्यापारिक सूत्रों की मानें तो चालान भरने के बाद भी यदि किसी वाहन को छोड़ने के लिए अतिरिक्त रकम देनी पड़े, तो इससे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ना स्वाभाविक है। मालवाहक वाहनों के खड़े रहने से माल की आपूर्ति प्रभावित होती है और परिवहन कारोबार से जुड़े लोगों को समय तथा धन दोनों का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
इसी को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं कि यदि वाहन के कागजात या एबीबील में कोई कमी है, तो नियमानुसार कार्रवाई और निर्धारित शुल्क के बाद वाहन छोड़ने की प्रक्रिया पारदर्शी क्यों नहीं होनी चाहिए? यदि अतिरिक्त धन की मांग की जा रही है, तो इसकी जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
विभागीय निगरानी पर उठ रहे सवाल
नौबतपुर में कथित वसूली के इन आरोपों ने विभागीय निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। आखिर चालान की राशि जमा होने के बाद वाहन छोड़ने की प्रक्रिया में देरी क्यों होती है? क्या वाहनों को रोकने और छोड़ने की प्रक्रिया का नियमित निरीक्षण किया जाता है? क्या व्यापारियों की शिकायतों को दर्ज करने और उनका निस्तारण करने के लिए प्रभावी व्यवस्था है?
इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच और आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
जांच और कार्रवाई की उठ रही मांग
मालवाहक वाहन मालिकों और व्यापारियों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वाहन रोकने से लेकर चालान काटने, भुगतान दर्ज करने और वाहन छोड़ने तक की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए। साथ ही, यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ अवैध वसूली के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
फिलहाल नौबतपुर में सेलटैक्स विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए जा रहे इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। अब देखना होगा कि विभाग इन शिकायतों को गंभीरता से लेकर जांच कराता है या फिर मालवाहक वाहन मालिकों और व्यापारियों की परेशानी यूं ही बनी रहती है।

