घोरावल (सोनभद्र)। थाना घोरावल पुलिस ने प्रॉपर्टी डीलर कुंवर मौर्य की सनसनीखेज हत्या के मामले का सफल अनावरण करते हुए एक महिला समेत तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, हत्या की साजिश मृतक के करीबी रिश्तेदारों ने रची थी, जो उधारी के पैसे न लौटाने, बेटी की जमीन हड़पने और परिवार की महिलाओं पर बुरी नजर रखने से आक्रोशित थे। पुलिस ने अभियुक्तों के पास से घटना में प्रयुक्त मोबाइल और नकदी बरामद की है।

सिरसी डैम में फेंका गया था शव
विदित हो कि चंदौली जिले के धानापुर निवासी प्रॉपर्टी डीलर कुंवर मौर्य की 22 मार्च की रात हत्या कर दी गई थी। हत्यारों ने पहचान छुपाने के लिए शव को मिर्जापुर के सिरसी डैम में फेंक दिया था। 27 मार्च को मृतक के भाई घासी मौर्य की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन में गठित टीम ने बुधवार सुबह खुटहा बाईपास तिराहा के पास से घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार अभियुक्त चन्द्रशेखर मौर्य उर्फ मखंचू (निवासी पड़रिया, मिर्जापुर, साहब लाल मौर्य निवासी नौगढवा पेढ़, सोनभद्र, लीलावती पत्नी साहब लाल मौर्य विश्वासघात और आक्रोश की कहानी पूछताछ में मुख्य अभियुक्त लीलावती ने बताया कि मृतक कुंवर मौर्य उसके दूर के रिश्तेदार थे और उनका घर पर आना-जाना था। हत्या के पीछे कई गंभीर कारण सामने आए हैं। 7 लाख की उधारी: कुंवर मौर्य ने लीलावती के भांजे चन्द्रशेखर से जमीन के नाम पर 7 लाख रुपये उधार लिए थे, जिसे वह लौटा नहीं रहे थे।
बेटी की जमीन हड़पना: मृतक ने लीलावती की बेटी सुमन की शादी पहले चंदौली में कराई, फिर उसे तुड़वाकर अपने ही बेटे से करवा दी। इसके बाद सुमन के नाम की 15 लाख की जमीन बेचकर सारा पैसा खुद के खाते में रख लिया। महिलाओं पर बुरी नजर: आरोपियों ने आरोप लगाया कि कुंवर मौर्य लीलावती की बेटी सुमन और चन्द्रशेखर की मूक-बधिर बहन पर गलत नजर रखते थे।
ऐसे दिया घटना को अंजाम
योजना के तहत 22 मार्च को लीलावती ने कुंवर मौर्य को फोन कर अपने घर बुलाया। वहां उसे खाना खिलाया और शराब पिलाई। जब वह सो गए, तब लीलावती, उसके पति साहब लाल और भांजे चन्द्रशेखर ने मिलकर गला दबाकर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद मृतक के ही ड्राइवर रोहित को जान से मारने की धमकी देकर शव को कार की डिग्गी में रखवाया और सिरसी डैम में फेंक दिया।
ड्राइवर ने खोला राज
हत्या के बाद आरोपी फरार हो गए थे, लेकिन 26 मार्च को ड्राइवर रोहित ने हिम्मत जुटाकर पूरी घटना की जानकारी मृतक के परिजनों को दे दी। पुलिस ने साक्ष्य मिटाने के लिए फेंके गए मोबाइल और जलाई गई सिम कार्ड के बावजूद तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना पर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस टीम: इस सफलता में प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह, उपनिरीक्षक सुनील कुमार और उनकी टीम की मुख्य भूमिका रही।

