दो दोषियों को 5-5 वर्ष की कठोर कैद

3-3 हजार रूपये अर्थदंड, न देने पर 3-3 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी

जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित की जाएगी

साढ़े 12 वर्ष पूर्व लाठी- डंडे से मारपीट कर गम्भीर चोट पहुंचाने का मामला


ज्ञानेंद्र शरण रॉय जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी, सोनभद्र।


सोनभद्र। साढ़े 12 वर्ष पूर्व आने जाने के विवाद में लाठी-डंडे से मारपीट कर गम्भीर चोट पहुंचाने के मामले में वृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए सत्र न्यायाधीश राम सुलीन सिंह की अदालत ने दोषसिद्ध पाकर दो दोषियों संतोष मौर्य व सोनू मौर्य को 5-5 वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई। इनके ऊपर 3-3 हजार रूपये अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड न देने पर 3-3 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। जेल में बितायी अवधि सजा में समाहित होगी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक रामसूरत मौर्य निवासी मधुपुर (कोइलहिया) , थाना रॉबर्ट्सगंज , जिला सोनभद्र ने रॉबर्ट्सगंज थाने में दी मौखिक तहरीर में आरोप लगाया था कि 25 जनवरी 2014 को जब वह गांव के संतोष मौर्य व सोनू मौर्य के घर के सामने से जा रहा था तभी आने जाने के विवाद में संतोष मौर्य व सोनु मौर्य अनायास गाली देने लगे। जब उसने कहा कि एक ही रास्ता है तो कहां से जाएं इतना सुनते ही दोनों उसे लाठी डंडे से मारने पीटने लगे, जिससे उसे कान, आंख के पास व सीने में गम्भीर चोटें आई। गांव के लोगों की मदद से दवा इलाज के लिए जिला अस्पताल लोढ़ी ले जाया गया। आवश्यक कार्रवाई करें। इस तहरीर पर पुलिस ने एनसीआर दर्ज कर लिया। 27 जनवरी को पुलिस ने जिला अस्पताल में रामसूरत मौर्य का डॉक्टरी जांच व मेडिकल कराया। कोर्ट के आदेश पर मामले की विवेचना की गई। विवेचक ने पर्याप्त सबूत मिलने पर गम्भीर चोट लगने की वजह से धारा 308 आईपीसी की बढ़ोतरी करते हुए संतोष मौर्य व सोनू मौर्य के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था।
मामले की सुनवाई के दौरान जहां अभियुक्तगणों के अधिवक्ता ने पहला अपराध बताते हुए कम से कम दंड दिए जाने की याचना की, वहीं जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी ज्ञानेंद्र शरण रॉय ने गम्भीर मामला बताते हुए अधिक से अधिक दंड देने की याचना की। अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान व पत्रावली का अवलोकन करने के बाद दोषसिद्ध पाकर दोषियों संतोष मौर्य व सोनू मौर्य को 5-5 वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई। इनके ऊपर 3-3 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड न देने पर 3-3 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी।

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