गुजरात से आए युवा वैज्ञानिक शाज़िया रईन, अंजलि चौहान ,मार्गदर्शक शिक्षक नंधिनी नायर को किया सम्मानित

ज़िला वलसाड, वापी गुजरात से आए युवा वैज्ञानिक विद्यार्थी शाज़िया रईन, अंजलि चौहान ,मार्गदर्शक शिक्षक नंधिनी नायर ने बताया कि Verdant Scan के अंतर्गत हम प्रकृति को समझना, रोगों को पहचानना प्रक्रिया को अपनाते हैं। इस उत्कृष्ट अनुसंधान बाबत पर्यावरण संस्कृति संरक्षण एवं मानव कल्याण टेस्ट के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन द्वारा शाज़िया रईन, अंजलि चौहान ,मार्गदर्शक शिक्षक नंधिनी नायर को सम्मानित किया।

आपने बताया कि हर पौधे में प्राकृतिक सक्रिय यौगिक होते हैं।जब ये यौगिक जैविक नमूनों में मौजूद तत्वों से मिलते हैं, तो रासायनिक प्रतिक्रिया होती है।इस प्रतिक्रिया से पौधों के अर्क का रंग बदल जाता है।इन रंग परिवर्तनों के आधार पर मधुमेह, मूत्र संक्रमण, निर्जलीकरण, लिवर तनाव या ऑक्सीडेटिव लोड जैसी स्थितियों का प्रारंभिक संकेत मिल सकता है।यह तकनीक किसी पैथोलॉजी लैब का विकल्प नहीं है, बल्कि एक प्रारंभिक, जागरूकता बढ़ाने वाला शैक्षणिक उपकरण है। Verdant Scan का उद्देश्य जिज्ञासा, जागरूकता और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना है।यह छात्रों, शिक्षकों और समुदायों को यह समझने में मदद करता है कि प्रकृति और रसायन विज्ञान कैसे एक-दूसरे से जुड़ते हैं।साथ ही यह पर्यावरण को सुरक्षित रखने वाली, रसायन-मुक्त और टिकाऊ निदान पद्धति को प्रोत्साहित करता है।प्रकृति में पहले से ही वे संकेत मौजूद हैं जिनकी हमें आवश्यकता है।हमारा काम उन्हें पढ़ना है।इसका मूल सिद्धांत यह है कि पौधों के प्राकृतिक अर्क मानव नमूनों में उपस्थित विशिष्ट यौगिकों से प्रतिक्रिया करते हैं। इन प्रतिक्रियाओं के कारण दिखाई देने वाले रंग परिवर्तन प्रारंभिक रोग पहचान में सहायता करते हैं।यह तकनीक कम संसाधन वाले क्षेत्रों में भी सस्ती, टिकाऊ और उपयोगी है।

ये भी पढ़िए