कांताबंजी, बलांगीर जिला, ओडिशा के विद्यार्थी राज आर्यन डोरा,दिलीप कु. सबर ने सहायक शिक्षक ओएवी, झरनी के मार्गदर्शन मे बधिरों के लिए शिक्षण प्रणाली का मॉडल प्रस्तुत कर बधिरों के लिए शिक्षा प्रणाली को सरल एवं सुगम बनाने का सार्थक प्रयास किया है! पर्यावरण संस्कृति संरक्षण एवं मानव कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने बधिरों के लिए शिक्षण प्रणाली मॉडल के बाबत विद्यार्थी राज आर्यन डोरा,दिलीप कु. सबर को सम्मानित किया !
राज आर्यन डोरा,दिलीप कु. सबर ने बताया कि यह प्रणाली बधिर लोगों को दांतों की मदद से शिक्षा प्राप्त करने में मदद करती है, बधिर व्यक्ति ऑडियो रिकॉर्ड की गई ध्वनि सुन सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति के मध्य कर्ण में चोट, आघात या संक्रमण के कारण उसका मध्य कर्ण ठीक से काम न करे, तो वह बहरा हो जाता है। ऐसे में, यदि आंतरिक कर्ण अच्छी स्थिति में हो, तो ध्वनि को खोपड़ी के माध्यम से दांतों द्वारा आंतरिक कर्ण तक पहुँचाया जा सकता है। यदि कार्यरत कर्णावर्त खोपड़ी के माध्यम से कंपन ग्रहण करता है, तो मस्तिष्क ध्वनि को महसूस कर सकता है। इस प्रकार, एक बधिर व्यक्ति दांतों और फिर खोपड़ी में होने वाले कंपन के माध्यम से, एक अपरंपरागत तरीके से संगीत का आनंद ले सकता है!

