अमिला धाम की राह हुई दुश्वार: 3 साल से जर्जर 40 KM सड़क ने रोकी श्रद्धालुओं की राह, व्यापार ठप

चोपन (सोनभद्र)। सोनभद्र के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शुमार अमिला धाम जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों के लिए ‘सफर’ अब किसी सजा से कम नहीं है। चोपन विकासखंड के पटवत मोड़ से अमिला धाम तक जाने वाली 40 किलोमीटर लंबी सड़क पिछले तीन वर्षों से बदहाली के आंसू रो रही है। सड़क की जर्जर अवस्था के कारण न केवल स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है, बल्कि इस वर्ष धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है।
ग्राउंड रिपोर्ट: गिट्टियां दे रही हैं जख्म, धूल फांक रहे दुकानदार
जब पटवत मोड़ से अमिला धाम के मार्ग का जायजा लिया, तो हकीकत बेहद डरावनी मिली। पिछले 3 साल से सड़क पर गिट्टियां बिछाकर छोड़ दी गई हैं, जिससे आए दिन राहगीर चोटिल हो रहे हैं। व्यापार पर पड़ा बुरा असर: स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों का कहना है कि रास्ता खराब होने से बाहरी लोगों ने आना बंद कर दिया है।आवागमन ठप: मुख्य मार्ग से जुड़ने का एकमात्र रास्ता होने के कारण स्थानीय निवासियों का संपर्क बाकी दुनिया से कट सा गया है।

“सड़क की दुर्दशा ने हमारी कमर तोड़ दी है। व्यापार पूरी तरह चौपट हो गया है। शासन-प्रशासन को इस तीर्थ स्थल की गरिमा का ख्याल रखते हुए काम में तेजी लानी चाहिए।”
— सत्यम गुप्ता व कन्हाई गोड (ग्राम प्रधान)

क्यों अटकी है राह? टेंडर और पुलिया का पेच
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण में देरी का मुख्य कारण टेंडर प्रक्रिया में सुस्ती और पुलिया निर्माण के काम में हो रही देरी है। हालांकि, पटवत मोड़ की तरफ से कुछ काम शुरू तो हुआ है, लेकिन उसकी रफ्तार इतनी धीमी है कि ग्रामीणों की मायूसी कम होने का नाम नहीं ले रही है।


इन लोगों ने उठाई आवाज
सड़क की समस्या को लेकर स्थानीय निवासी सत्यम गुप्ता, सुदामा पाल, विक्रम सिंह यादव, राजदेव, सुरेश बलवंत, राम सिंह और स्थानीय प्रधान कन्हाई गोड ने विस्तार से अपनी पीड़ा साझा की। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द ही सड़क का कायाकल्प नहीं हुआ, तो क्षेत्र का विकास और तीर्थ स्थल की महत्ता दोनों संकट में पड़ जाएंगे।


मुख्य बिंदु:
दूरी: 40 किलोमीटर (पटवत मोड़ से अमिला धाम)।
स्थिति: पिछले 3 वर्षों से सिर्फ गिट्टियां बिछी हैं।
प्रभाव: नवरात्रि और सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या घटी। मांग: निर्माण कार्य में तेजी और गुणवत्ता में सुधार।

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