आदिवासी अधिकारों को लेकर संघर्ष करेगा- आदिवासी संघर्ष मोर्चा

रिपोर्ट मदन मोहन चंदौली : नौगढ़ बनाधिकार कानून के तहत दावा दाखिल करने वाले सभी दावेदारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिए जाने,पुस्तों से बसें तथा खेती करते आ रहे आदिवासी बनवासी व अन्य परंपरागत वन निवासियों को उनकी जमीन तथा मकान से बेदखली पर रोक लगाए जाने,गोंड आदिवासी जातियों समेत तमाम आदिवासी जातियों को अनुसूचित जन जाति का जाति प्रमाण पत्र जारी करने का शासनादेश जारी किए जाने तथा पंचायत चुनाव में एस टी सीट रिजर्व किया जाने,तेन महुआ पियार समेत तमाम वन संपदाओं पर आदिवासियों वनवासियों का पुस्तैनी अधिकार बहाल किए जाने,नौगढ़ में पेय जल संकट का स्थाई हल निकाले जाने,जमीन के अभाव में 179 पात्र लाभार्थियों के मुख्यमंत्री आवास को जमीन देकर बनवाने के साथ-साथ नौगढ़ तहसील के तमाम ग्राम पंचायतों में जन चौपाल लगाकर मुख्यमंत्री आवास के पात्रों की सूची तैयार किए जाने तथा जमीन देकर आवास बनवाए जाने समेत तमाम सवालों को लेकर नौगढ़ दुर्गा मंदिर स्थल पर आदिवासी वनवासी तथा अन्य परंपरागत वन निवासी एकता सम्मेलन,आदिवासी संघर्ष मोर्चा के बैनर तले आयोजित किया गया,सम्मेलन को संबोधित करते हुए आदिवासी संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संयोजक सुरेश कोल ने कहा की सरकारें लगातार आदिवासी अधिकारों पर हमला कर रही है जिसके खिलाफ आदिवासी संघर्ष मोर्चा आंदोलन को तीखा करेगा।
सम्मेलन को मुख्य वक्ता के बतौर संबोधित करते हुए भाकपा(माले) राज्य सचिव कामरेड सुधाकर यादव ने कहा की आदिवासी अधिकारों के संरक्षण के लिए तमाम सारे कानून बने हुए है,वर्तमान भाजपा के डबल इंजन की सरकार एक-एक करके आदिवासी अधिकारों पर हमला कर रही है यहां तक की गोंड आदिवासी समेत तमाम आदिवासी समाज के लोगों का जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए भी इतनी कड़ी शर्तें लगा दी गई है कि लोगों का जाति प्रमाण पत्र बनाना ही मुश्किल हो गया है।
माले राज्य सचिव ने आगे कहा की आदिवासी अधिकारों की बहाली के लिए चल रहे छिट फूट संघर्षों को संगठित करने के लिए बन रहे आदिवासी संघर्ष मोर्चा का यह सम्मेलन इस बात को दिखाता है की अब सरकारें आदिवासी अधिकारों पर हमला नहीं कर पाएंगी क्यों की आदिवासी अधिकारों के लिए संघर्ष और तेज होगा।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए नौगढ़ के चर्चित आदिवासी नेता रामकृत कोल ने कहा कि चंदौली जिले का नौगढ़ तहसील,जहां तहसील ब्लाक के अधिकारियों समेत वन तथा पुलिस के भी बड़े अधिकारी तैनात हैं।नौगढ़ के आदिवासी बनवासी जल जंगल जमीन पर अपना पुश्तैनी अधिकार बहाल कराने के लिए संघर्षरत हैं क्यों कि वन संपदाओं पर बड़े वन-भू माफिया अपना कब्जा बढ़ाते जा रहे है।
पुस्ताें से बसें तथा खेती करते आ रहे आदिवासी बनवासी तथा अन्य परंपरागत वन निवासियों को उनकी जमीन तथा मकान से बेदखल किया जा रहा है जबकि बड़े वन-भू-माफियाओं को संरक्षण दिया जा रहा है।
पतालू गोंड ने कहा कि एक तरफ जहां पिछले दिनों 179 पात्र लाभार्थियों का मुख्यमंत्री आवास खतरे में पड़ गया वहीं गोंड आदिवासी जातियों समेत तमाम आदिवासी समाज के लोगों का जाति प्रमाण न बन पाने की वजह से पूरा जीवन खतरे में पड़ गया है।
भाकपा(माले) नेता कामरेड रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि वन विभाग द्वारा आदिवासी बनवासी तथा अन्य परंपरागत वन निवासियों की झोपड़ी उजाड़े जाने तथा जमीन पर गड्ढा खोदे जाने की मनमानी कार्यवाही के खिलाफ अन्य तमाम सवालों को हल करने के लिए हमें संगठित ताकत के बतौर आवाज उठानी होगी तथा लोकतांत्रिक तरीके से अपने संघर्षों को आगे बढ़ाना होगा।
आइए वन विभाग द्वारा दोहरा चरित्र अपनाते हुए बड़े बन भू माफियाओं को संरक्षण देने एवं वनवासियों आदिवासियों दलित गरीबों तथा अन्य परंपरागत वन निवासियों की झोपड़ी तथा मकान गिराए जाने एवं उनकी जमीनों में गड्ढा खोदे जाने के खिलाफ संघर्ष को तेज करे,अपनी संगठित ताकत का प्रदर्शन करें तथा शासन प्रशासन तक अपनी आवाज पहुंचाए।
सम्मेलन में 13 सदस्यीय आदिवासी संघर्ष मोर्चा का चुनाव किया गया जिसके अध्यक्ष चर्चित आदिवासी नेता रामकृत कोल तथा ब्लॉक सचिव बाबूलाल खरवार को चुना गया।
सम्मेलन की अध्यक्षता शिव नारायण खरवार, पतालू गोंड तथा सितारा कुमारी के तीन सदस्यीय अध्यक्षमंडल ने तथा संचालन कामरेड रामेश्वर प्रसाद ने किया।

ये भी पढ़िए