(ऋषभ सिंह)सोनभद्र : उत्तर प्रदेश सरकार की जनसुनवाई प्रणाली (IGRS) को आम जनता की शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण का माध्यम माना जाता है, लेकिन सोनभद्र के चतरा विकास खंड की पड़री कलाँ ग्राम पंचायत से सामने आया मामला इस व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि ग्राम समाज की बंजर भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत का निस्तारण बिना शिकायतकर्ता से संवाद किए और पुरानी तस्वीरें अपलोड कर कर दिया गया।
मामला ग्राम पंचायत पड़री कलाँ की गाटा संख्या 611(क) स्थित करीब डेढ़ बीघा ग्राम समाज की बंजर भूमि का है। यह भूमि सार्वजनिक उपयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसके समीप पोखरा, सरकारी राशन की दुकान, आरआरसी सेंटर और दुर्गा पूजा स्थल स्थित हैं। आरोप है कि उक्त भूमि पर एक व्यक्ति द्वारा मवेशी बांधकर और मड़ई डालकर दोबारा अवैध कब्जा किया जा रहा है।
ग्राम प्रधान विजय कुमार ने इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (1076) और IGRS पोर्टल पर दर्ज कराई थी। अभिलेखों के अनुसार 23 मई को राजस्व एवं पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटवाया था, लेकिन उसी रात दोबारा कब्जा कर लिया गया। इसके बाद ग्राम प्रधान ने पुनः शिकायत संख्या- 92620000021093 दर्ज कराई।
आरोप है कि शिकायत के निस्तारण के दौरान IGRS की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। ग्राम प्रधान का कहना है कि न तो उनसे दूरभाष या व्यक्तिगत रूप से कोई संवाद किया गया और न ही दोबारा मौके का सत्यापन किया गया। इसके बजाय मई माह की पुरानी कार्रवाई की तस्वीरें पोर्टल पर अपलोड कर यह आख्या लगा दी गई कि मौके पर कोई अतिक्रमण नहीं है।
ग्राम प्रधान ने इस कार्रवाई को नियमों के विपरीत बताते हुए IGRS पोर्टल पर नकारात्मक फीडबैक दर्ज कराया है। साथ ही जिलाधिकारी सोनभद्र को लिखित शिकायत भेजकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और संबंधित राजस्व कर्मियों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम प्रधान का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधियों द्वारा सरकारी भूमि की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से शिकायतें की जाती हैं, तो उनका निष्पक्ष और पारदर्शी निस्तारण होना चाहिए। बिना स्थलीय सत्यापन और शिकायतकर्ता से संवाद किए आख्या लगाना न केवल जनसुनवाई प्रणाली की विश्वसनीयता पर प्रश्न खड़ा करता है, बल्कि सरकारी भूमि संरक्षण की प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर हैं कि इस शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाती है या नहीं तथा यदि प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाती है।

