शिक्षकों की कार्यशैली और विभागीय लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल।

(अरुण पांडेय)

समय से स्कूल न पहुंचने और पठन-पाठन ठप होने का आरोप, विभागीय अभिलेखों की मॉनिटरिंग पर भी संशय

बभनी (सोनभद्र)। बभनी विकास खंड के सरकारी विद्यालयों में न केवल मध्याह्न भोजन (एमडीएम) की गुणवत्ता राम भरोसे है, बल्कि शिक्षकों की उपस्थिति और कार्यशैली पर भी स्थानीय लोगों ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) की अनुपस्थिति और ढीली निगरानी का सीधा फायदा उठाकर कई विद्यालयों में व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।
क्या समय से स्कूल पहुंचते हैं शिक्षक?
स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि पूरे विकास खंड में संचालित विद्यालयों में कई शिक्षक नियमानुसार समय पर स्कूल नहीं पहुंचते। समय से न आने के कारण बच्चों का पठन-पाठन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या विद्यालय खुलने के बाद बच्चे वाकई पढ़ाई कर रहे हैं या फिर केवल खानापूर्ति की जा रही है?

अभिलेखों और खेलकूद गतिविधियों की निगरानी कौन करे?

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि दैनिक छात्र उपस्थिति, शिक्षकों की उपस्थिति पंजी, विभागीय अभिलेखों का रख-रखाव और बच्चों के खेलकूद व शारीरिक शिक्षा जैसी गतिविधियों की निगरानी आखिर कौन कर रहा है? जब बीईओ ही सप्ताह में बमुश्किल एक-दो दिन आते हैं, तो इन व्यवस्थाओं का जायजा लेने वाला कोई नहीं बचता।

मीटिंग और प्रशिक्षण के चक्कर में सिमटा निरीक्षण।

बीईओ सुनील कुमार प्रजापति का बभनी में मिलने वाला सीमित समय भी बीआरसी पर आयोजित बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कागजी औपचारिकता निपटाने में निकल जाता है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि बीईओ धरातल पर जाकर विद्यालयों के निरीक्षण के लिए कितना समय निकाल पाते होंगे?

क्या मासूमों के भविष्य पर भारी पड़ रही प्रशासनिक लापरवाही?

अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि क्या जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की यह उदासीनता बभनी के मासूम बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का बड़ा कारण नहीं बन रही है? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बभनी में अस्थाई खंड शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति कर व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो वह आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

व्यास चंद्र विश्वकर्मा (प्रतिनिधि) जिला पंचायत सदस्य।

जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि व्यास चंद्र विश्वकर्मा ने बभनी की शिक्षा प्रणाली पर चिंता जाहिर करते हुए बोले कि यह बहुत ही गंभीर विषय है कि जहां एक ओर बच्चों के पठन-पाठन के लिए सरकार तरह-तरह की सुविधा मुहैया कराने में लगी है वहीं जिला-प्रशासन की विभागीय लापरवाही मासूमों के भविष्य के साथ एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है तीन-चार महीने से विकास खंड में शिक्षा व्यवस्था की निगरानी करने वाला कोई नहीं है एक बीईओ के कंधे पर दो विकास खंडों की जिम्मेदारी थोप दी गई है जिसके कारण केवल बभनी ही नहीं बल्कि म्योरपुर विकास खंड भी प्रभावित हो रहा है इसलिए बभनी शिक्षा क्षेत्र में स्थाई बीईओ का होना अनिवार्य है।

अर्जुन गुप्ता विधानसभा उपाध्यक्ष अपनादल यस।

अपनादल यस के विधानसभा उपाध्यक्ष अर्जुन गुप्ता कहते हैं कि जिला प्रशासन की लापरवाही मासूमों के भविष्य का बड़ा सबब बन रही है विद्यार्थियों की शिक्षा व्यवस्था तो बेपटरी हो ही रही है साथ-साथ शिक्षकों की अनियमितता भी चरम सीमा पर पहुंच चुकी है जो अब मनमानी का रुप भी लेने लगी है जिसका निरीक्षण करने वाला कोई नहीं है इसलिए इसलिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को चाहिए कि बभनी में एक स्थाई खंड शिक्षा अधिकारी की तैनाती होनी चाहिए।

देव कुमार विश्वकर्मा जिला सह सचिव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी

देव कुमार विश्वकर्मा ने कहा कि इन दिनों बभनी विकास खंड की शिक्षा प्रणाली लावारिस की तरह हो गई है यहां जब मन तब आओ जब मन तब जाओ मन किया तो पढ़ाए अन्यथा बैठे रहे समय पूरा होने पर घर चले गए इस बात की सुध लेने वाला कोई नहीं सबको पता है कि बीईओ हमारे विद्यालय पर आने वाले हैं नहीं यदि कोई शिकायत भी किया तो कुछ होने वाला नहीं है उन्होंने यह भी कहा कि यहां तक कि विद्यालयों में छात्र उपस्थिति कितनी है और एमडीएम पर संख्या कितनी दी जाती है यह प्रक्रिया भी मनमानी तरीके से चल रही है मानक के अनुसार एमडीएम चल रहा है कि नहीं समय-समय पर फल दूध दिए जा रहे हैं कि नहीं इसकी निगरानी कौन करे? खंड शिक्षा अधिकारी की तो बात ही अलग है। उन्होंने जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं की गई और बभनी विकास खंड में स्थाई खंड शिक्षा अधिकारी की तैनाती नहीं की गई तो हम मासूमों के हक के लिए अविभावकों व स्थानीय लोगों के साथ आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे।

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