मीरजापुर में मुगल शासक सिकन्दर के द्वारा बनवाए हुए 1412 साल पुराने ऐतिहासिक इफ्तिखार खां के मकबरा को देखने के लिए काफी संख्या में आते हैं सैलानी

(तौसीफ अहमद) मीरजापुर : के चूनार में स्थित मुगल सम्राट जहांगीर (1605-27) का एक पर शिकारी इफ्तिखार खाँ के इस मकबरे का निर्माण लगभग 16 13 ई. में चुनार के बलुआ पत्थर द्वारा किया गया। मकबरे के प्रवेश द्वार पर स्थित एक कुए से प्राप्त अभिलेख के आधार पर इसे किसी अज्ञात सिकन्दर के द्वारा 1613 ई. में निर्मित माना जाता है। इस सिकन्दर नामक निर्माणकर्ता के बारे में भी कोई विशेष जानकारी उपलब्ध नहीं है परइस क्षेत्र के सराय सिकन्दर के नाम ने उसे अमर कर दिया। यह मकबरा पूर्व में तहसीलदार दफ्तर के नाम से भी जाना जाता था। इफ्तिखार खाँ अपनी विलेरी और बहादुरी के लिए प्रसिद्ध था एवं 1612 ई. के एक युद्ध में बंगाल में वीरगति प्राप्त की थी। इस मकबरे का एकमात्र प्रवेश द्वार दक्षिण की ओर स्थित है। मकबरे की निर्माण की मुख्य योजना वर्गाकार है एवं यह एक ऊँचे चबूतरे पर निर्मित है। यह मकबरा पंचपहलनुमा है, इसमें एक मुख्य गुम्बद है और उसके चारों कोणो पर एक- एक मीनार है। मुख्य गुम्बद अर्द्धगोलाकार है उसके ऊपर एक उल्टा कमल बना हुआ है। मकबरे के सम्मुख भाग में श्रृंखलाबद्ध मेहराबनुमा खिड़‌कियां और ताखे बने हुए हैं। सम्पूर्ण स्मारक एक चहारदीवारी से घिरा हुआ है। मकबरे का प्रांगण चारबाग पद्धति पर आधारित उद्यान से सुसज्जित था, पर अब यह नष्ट हो गया है। इसकी निर्माण शैली मुगलकालीन वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। तो वहीं वहां पर जब अहिंसा एक्सप्रेस न्यूज़ हिंदी समाचार पत्र के मण्डल ब्यूरो चीफ तौसीफ अहमद के द्वारा पहुंचकर जब इस मकबरे के बारे में जानकारी प्राप्त की गई तो वहां की देखरेख करने वाले जो कि उनके पुश्तैनी दादा और पर दादा इस मकबरे की देखभाल कर रहे हैं। उनके वारिस अनिल यादव वह उनके साथी छोटू अली के द्वारा बताया गया कि यहां पर काफी संख्या में बाहर से लोग इसको देखने के लिए आते हैं और समय-समय पर यहां पर साफ सफाई व अच्छी व्यवस्थाएं भी की जाती हैं।

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