सीसीटीवी से होगी निगरानी, टीकाकरण-टैगिंग और चिकित्सा व्यवस्था पर जोर — वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश
सोनभद्र। जनपद में गोवंश संरक्षण व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक कार्ययोजना पर जोर दिया है। विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में गोआश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं, गोवंशों की देखभाल और संरक्षण से जुड़े कार्यों की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान अधिकारियों को नियमित निगरानी, सत्यापन और जवाबदेही के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए। मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि गोवंश संरक्षण एवं फण्ड डिमांड से संबंधित कार्यों का नियमित अनुश्रवण किया जाए। सहभागिता के लिए प्राप्त आवेदनों तथा फण्ड डिमांड की समीक्षा करते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सभी कार्यों का समुचित अभिलेखीकरण एवं सत्यापन भी अनिवार्य रूप से कराया जाए, जिससे योजनाओं में पारदर्शिता बनी रहे। उन्होंने गोआश्रय स्थलों का निर्धारित रोस्टर के अनुसार नियमित निरीक्षण कर निरीक्षण आख्या समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। गोवंशों की पकड़ने और परिवहन की व्यवस्था के लिए आवश्यकता के अनुसार कैटिल कैचर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
सीसीटीवी से होगी गोआश्रय स्थलों की निगरानी
गोआश्रय स्थलों में व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखने के लिए सीसीटीवी कंट्रोल रूम को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। आवश्यक टीवी सेट एवं इनवर्टर की व्यवस्था कराने को भी कहा गया, ताकि गोआश्रय स्थलों की निगरानी व्यवस्था मजबूत हो सके।
सालभर हरा चारा उपलब्ध कराने की तैयारी
मुख्य विकास अधिकारी ने गोवंशों के लिए वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देते हुए कृषकों एवं पशुपालकों से नियमित आपूर्ति के लिए अनुबन्ध कराने के निर्देश दिए। वहीं गोचर भूमि को कब्जामुक्त कराने तथा उपलब्ध भूमि पर हरा चारा उगाने के लिए वीबीजी-रामजी के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।
टीकाकरण और चिकित्सा व्यवस्था पर विशेष जोर
गोवंशों का नियमित टीकाकरण, टैगिंग, डिवर्मिंग एवं चिकित्सा सुनिश्चित करने के साथ सभी कार्यों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए। गोआश्रय स्थलों पर पर्याप्त केयरटेकर की उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया। बैठक में गोआश्रय स्थलों की मूलभूत सुविधाओं और आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए वीबीजी-रामजी, डीएमएफ एवं सीएसआर के माध्यम से कार्य कराने पर चर्चा हुई। इसके अलावा एनजीओ, एफपीओ, संस्थाओं, समितियों एवं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गोआश्रय स्थलों के संचालन की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। मुख्य विकास अधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि गोवंश संरक्षण से जुड़े सभी कार्यों में संवेदनशीलता, नियमित निगरानी और जवाबदेही के साथ काम किया जाए, ताकि जिले में गोवंशों के लिए बेहतर आश्रय, पर्याप्त चारा और प्रभावी चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित हो सकें।
बैठक में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अजय कुमार मिश्रा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

