डीएम के स्थलीय निरीक्षण में खुली स्टाम्प शुल्क की गड़बड़ी, 12 लाख की कमी उजागर

कृषि दर पर कराया था संपत्तियों का मूल्यांकन, मौके पर मिला आवासीय उपयोग व निर्माण — दो बैनामों का कराया गया पुनर्मूल्यांकन

सोनभद्र। संपत्तियों के पंजीयन में वास्तविक स्थिति के अनुरूप मूल्यांकन और निर्धारित स्टाम्प शुल्क की वसूली सुनिश्चित कराने के लिए जिलाधिकारी श्री चर्चित गौड़ ने गुरुवार को ग्राम लोढ़ी और सहिजन खुर्द में पहुंचकर बैनामों का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच के दौरान दो प्रकरणों के पुनर्मूल्यांकन में करीब 12 लाख रुपये के स्टाम्प शुल्क की कमी सामने आई। जिलाधिकारी ने सहायक महानिरीक्षक निबंधन एवं उप जिलाधिकारी रॉबर्ट्सगंज श्री आशीष कुमार त्रिपाठी तथा संबंधित लेखपालों के साथ संपत्तियों का भौतिक सत्यापन किया। इस दौरान बैनामों में दर्ज विवरण का मौके की वास्तविक स्थिति से मिलान किया गया। भूमि का वर्तमान उपयोग, निर्माण, संपर्क मार्ग, आसपास हुए विकास तथा क्षेत्र में हाल में हुए संपत्ति विक्रयों की भी जांच की गई।
निरीक्षण में सामने आया कि कुछ संपत्तियों का मूल्यांकन कृषि दर के आधार पर कराया गया था, जबकि मौके पर भूमि का आवासीय उपयोग और निर्माण पाया गया। वास्तविक स्थिति एवं आसपास के क्षेत्र में हुए विक्रयों को आधार बनाकर दोनों प्रकरणों का पुनर्मूल्यांकन कराया गया। पुनर्मूल्यांकन के बाद देय स्टाम्प शुल्क की तुलना में लगभग 12 लाख रुपये की कमी पाई गई।

नियमानुसार होगी स्टाम्प शुल्क की वसूली

जिलाधिकारी श्री चर्चित गौड़ ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्थलीय जांच में सामने आए तथ्यों एवं अभिलेखों के आधार पर स्टाम्प शुल्क की कमी की नियमानुसार वसूली सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि संपत्तियों के पंजीयन के समय उनकी वास्तविक स्थिति और निर्धारित मूल्यांकन दरों का सही अनुपालन कराया जाए, जिससे शासकीय राजस्व को नुकसान न पहुंचे।
डीएम ने स्पष्ट किया कि स्टाम्प शुल्क निर्धारण में पारदर्शिता और राजस्व संरक्षण के लिए संपत्तियों का स्थलीय सत्यापन आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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