भोपाल : गांधी स्मारक निधि आश्रम गांधी के स्वराज और अहिंसा के सिद्धांतों से प्रेरित एक आत्मनिर्भर जीवनशैली को बढ़ावा देने के सिद्धांत को प्रतिपादित करता हैं,पर्यावरण संस्कृति संरक्षण एवं मानव कल्याण ट्रस्ट अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने गांधी निधि छतरपुर आश्रम पर भ्रमण किया एवम आश्रम पर संस्था सचिव दमयंती दीदी और सहायक बहनों से मुलाकात कर संचालित व्यवस्थाओं एवम गांधी विचारों सत्य ,अहिंसा, निष्ठा ईमानदारी का यथार्थ रूप देखा। सामाजिक समरसता,

विश्वास एकता के साथ मिलजुल कर साथ कार्यरत सहयोगी बहने किस प्रकार मिट्टी में बीज का अंकुरण कर खेत से निकले अनाज को प्रोसेस कर स्वादिष्ट एवं संतुलित आहार के रूप में भोजन की थाली को हमारे सामने प्रस्तुत करती है,यह यहां की नारी शक्ति के साहस एवम वात्सल्य का ही परिणाम है।गांधी निधि छतरपुर आश्रम पर गांधीवादी सिद्धांतों के आधार पर ही प्राकृतिक चिकित्सा ,जनसेवा एवम गो शाला मेंसेवा की जाती हैं, सुबह 4 बजे से लेकर शाम तक गो सेवा एवम विभिन्न रूपों में श्रम साधना की जाती हैं। यहां कोई भी समाजसेवी, पर्यावरण प्रेमी आकर किसी भी रुप में गो सेवा अथवा जैविक खेती में भी श्रमदान करके तनाव मुक्त होकर आसानी से रोग मुक्त हो सकता है। यहां आने वाले प्रकृति प्रेमी जिज्ञासु प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य वृक्ष के नीचे जैविक अनाजों से मिट्टी के चूल्हे पर बने भोजन का आनंद भी ले सकते है।यहां आश्रम पर सभी जैविक अनाज एवं उनसे बने शुद्ध उत्पाद उचित दाम पर हमेशा सभी के लिए उपलब्ध रहते है, यह उन लोगों के लिए भी एक सफल प्रयास है,जो आसपास रह रहे लोगों को रोजगार प्रदान कर आत्मनिर्भर भी बनाता है।
दमयंती दीदी ने बताया कि गांधी निधि छतरपुर में गांधीजी के सत्य और अहिंसा के मूल्यों पर आधारित विश्व की स्थापना करने का एक सफल प्रयास किया हैं और इस उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए हमने कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। इनमें एक प्राचीन पुस्तकालय, जैविक खेती, शांति अध्ययन और बहुत कुछ शामिल है। गांधी निधि आश्रम पर तरह की गतिविधियाँ संचालित हैं जो युवाओं से लेकर खेती करने वालों और वयस्कों तक को शिक्षा संबंधी सहायता प्रदान करती हैं और सभी को अच्छा स्वास्थ्य सेवा प्रदान करती हैं। यहां रचनात्मक गतिविधियों और अहिंसक सामाजिक और पारिस्थितिक सक्रियता से प्रेरित होकर आश्रम पर रह कर सीखने के लिए एक समृद्ध वातावरण हैं।

