दुद्धी – रामलीला में लंका दहन का भव्य प्रस्तुति

जितेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी दुद्धी (सोनभद्र)। श्री रामलीला नाट्य कला परिषद दुद्धी द्वारा आयोजित ऐतिहासिक श्रीरामलीला में शुक्रवार की रात राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध एवं लंका दहन की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। श्रीराम की मित्रता, धर्म की रक्षा और भक्त हनुमान की भक्ति व पराक्रम के प्रसंगों ने उपस्थित दर्शकों को गहराई तक भावुक कर दिया।
मंचन में दिखाया गया कि वनवास के दौरान श्रीराम की भेंट सुग्रीव से होती है। सुग्रीव अपने भाई बाली से राज्य और पत्नी दोनों छिन जाने के दुख में थे। श्रीराम ने उनकी पीड़ा सुनकर उनसे मित्रता कर ली और उनकी सहायता का वचन दिया। इसके बदले सुग्रीव ने माता सीता की खोज में अपनी पूरी वानर सेना का सहयोग देने का वचन दिया।
इसके बाद बाली-सुग्रीव युद्ध का प्रसंग मंचित किया गया। सुग्रीव ने बाली को युद्ध के लिए ललकारा, लेकिन बाली की शक्ति के सामने वह पराजित होकर भाग निकला। तब श्रीराम ने बाण से बाली का वध किया। मंच पर बाली के अंतिम समय में श्रीराम से धर्म की बात करने और श्रीराम द्वारा सुग्रीव के साथ किए गए वचन की रक्षा करने का प्रसंग प्रस्तुत हुआ।


लीला में आगे समुद्र लांघकर लंका पहुंचे हनुमान जी ने अशोक वाटिका में माता सीता को देखा। उन्होंने श्रीराम की अंगूठी देकर उन्हें प्रभु श्रीराम का संदेश दिया। माता सीता ने भी श्रीराम को अपनी सुधि दिलाने के लिए अपने शिर से चूड़ामणि निकालकर हनुमान जी को भेंट की। हनुमान जी ने चूड़ामणि ग्रहण कर उसे श्रीराम तक पहुंचाने का वचन दिया।
इसके बाद रावण के दरबार में हनुमान जी ने उसे माता सीता को श्रीराम को सौंपने और उनकी शरण लेने की सलाह दी, लेकिन अहंकारी रावण ने उनकी बात नहीं मानी। रावण द्वारा हनुमान जी की पूंछ में कपड़ा लपेटकर आग लगाने के बाद हनुमान जी ने अपनी पूंछ से सोने की लंका को जला दिया। लंका दहन के बाद हनुमान जी समुद्र पार कर श्रीराम के पास पहुंचे और उन्हें माता सीता की कुशलता तथा लंका में उनके अवस्थित होने की सूचना दी। उन्होंने माता सीता द्वारा भेजी गई चूड़ामणि प्रभु श्रीराम को भेंट की। चूड़ामणि देखकर श्रीराम भावुक हो उठे ।
आज शनिवार की लीला में विभीषण शरणागति, सेतुबंध एवं श्री रामेश्वरम स्थापना के साथ अंगद-रावण संवाद की लीला का भव्य मंचन किया जाएगा।
रामलीला का संचालन एवं निर्देशन महंत देवेंद्र मिश्रा तथा व्यास विवेकानंद मिश्रा कर रहे हैं।

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