सोनभद्र। पेंशनधारकों को पेंशन और PPO में सुधार के नाम पर डराकर लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का6 सोनभद्र साइबर क्राइम पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के दो सदस्यों को कोलकाता, पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 10 मोबाइल फोन, वाई-फाई राउटर, चार सिम कार्ड और 53 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, मामले में पीड़ित को फोन कर खुद को पेंशन विभाग/रेलवे का अधिकारी बताया गया। आरोपियों ने PPO नंबर में सुधार, मोबाइल नंबर बंद होने तथा पेंशन संबंधी समस्या का भय दिखाकर पीड़ित से बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी हासिल की। इसके बाद APK फाइल अथवा लिंक भेजकर मोबाइल की स्क्रीन शेयर कराई गई और OTP हासिल कर खाते से करीब 31 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लिए गए। इसके अलावा फोनपे के जरिए एक लाख रुपये तथा 10 लाख रुपये की FD भी कराई गई।
रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का डेटा बनाता था निशाना
पूछताछ में सामने आया कि गिरोह रेलवे के पेंशनभोगियों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और अधिकारियों का डेटा जुटाकर उन्हें निशाना बनाता था। आरोपी स्वयं को रेलवे बोर्ड अथवा विभाग का अधिकारी बताकर PPO नंबर, पेंशन और अन्य विवरणों के आधार पर पीड़ित का भरोसा जीतते थे। इसके बाद मोबाइल अपडेट, PPO में सुधार या पेंशन बंद होने का डर दिखाकर गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती थी।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी UMEED Portal के RASS Tab पर रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का डेटा हासिल करने के लिए जन्मतिथि का अनुमान लगाकर विवरण खोजते थे। डेटा मिलने के बाद उसकी जानकारी पेंशनर को भेजकर पहले विश्वास कायम किया जाता था और फिर ठगी का जाल बिछाया जाता था।
डेटा उपलब्ध कराने वालों की भूमिका भी जांच के घेरे में
पुलिस पूछताछ में पवन मंडल और मुकेश मंडल निवासी झारखंड के नाम डेटा उपलब्ध कराने वालों के रूप में सामने आए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारियों का डेटा कहां से और किन लोगों की मदद से हासिल किया जाता था। इस संबंध में रेलवे कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
गिरोह में अलग-अलग सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं। कोई डेटा उपलब्ध कराता था, कोई पेंशनधारकों को फोन करता था, तो कोई बैंक खाते उपलब्ध कराने और ATM से ठगी की रकम निकालकर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाने का काम करता था। पूछताछ में धनबाद, समस्तीपुर, हापुड़, सम्भल और मुंगेर समेत कई स्थानों पर लाखों रुपये की ठगी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
तकनीकी साक्ष्यों से खुला राज
साइबर क्राइम पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य तकनीकी माध्यमों से जांच आगे बढ़ाते हुए आरोपियों की पहचान की। इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को कोलकाता, पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मनीष कुमार शाह (30) निवासी मिर्जा चौकी, साहेबगंज, झारखंड तथा रूपक कुमार (54) निवासी गोपडीह बांका, झारखंड के रूप में हुई है।
पुलिस की अपील—OTP और स्क्रीन शेयरिंग से रहें सावधान
पुलिस ने आमजन, विशेषकर पेंशनधारकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सतर्क करते हुए कहा है कि पेंशन, PPO, बैंक खाता या मोबाइल बंद होने के नाम पर फोन करने वाले किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, ATM PIN, UPI PIN या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी न दें। किसी अनजान APK फाइल अथवा लिंक को डाउनलोड न करें और किसी के कहने पर मोबाइल की स्क्रीन शेयर न करें। पुलिस ने साइबर ठगी होने पर तत्काल 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है।

