भोपाल के महेश खुराना पेशे से व्यवसायी हैं और हेमंत खरे मप्र अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड में कार्यरत हैं। भोपाल के दो युवा साइकलिस्ट महेश कुमार खुराना और हेमंत खरे ने साइकिल से 1 फरवरी को नर्मदा परिक्रमा यात्रा बांद्राभान से प्रारंभ की , सुशील कुमार जैन ने बताया कि आप दोनों ने 3,000 किमी नर्मदा परिक्रमा सिर्फ 23 दिन में पूरी की है, जिसमे एक दिन विश्राम किया, इस प्रकार यात्रा 24 दिन में पुरी हुई।

आप दोनों ने कहा मां नर्मदा परिक्रमा में हमें संत सिंगाजी महाराज समाधि स्थल,बाजीराव पेशवा समाधि स्थल,सियाराम बाबा जी की समाधि स्थल,लव कुश जन्म स्थान,जयंती माता मन्दिर,दक्षिण का काशी कहे जाने वाला, प्रकाशा (महाराष्ट्र) ,दादा गुरु जी का आशीर्वाद मिलना,कुबेर भंडारी के दर्शन,हर सिद्धि माता मन्दिर राजपिप्ला,गरुडेश्वर दत्त मन्दिर,हरसूद और बड़वानी के जल भराव देखना,रेवा सागर को नाव से पार करना, अमरकंटक मे मैया की बगिया, नर्मदा उद्गम कुंड,शूलपणेश्वर् महादेव के दर्शन कर हमारा जीवन कृतज्ञ हुआ, मां नर्मदा की परिक्रमा से हमारा मानव जीवन सफल हो गया । रास्ते में मिलने वाले छोटे छोटे बच्चे जो हर हर नर्मदे बाबा जी कह कर बुलाते थे ,सभी के प्रति वात्सल्य हमारे जीवन पर्यंत की ऐतिहासिक यादगार बन चुकी है, इसके अतिरिक्त नर्मदा का अलौलिक सौंदर्य और रास्ते में मिलने वाले प्राचीन मंदिर और पुरातात्विक धरोहरें ने हमारे भारतीय होने का अभिमान हमे दिया। कुल 3000 किमी की परिक्रमा यात्रा में कच्चे पक्के और जंगल-झाड़ी के रास्ते पार किए। पर्यावरण संरक्षण बाबत लोगों को प्लास्टिक का उपयोग न करने बाबत और हरित, प्राकृतिक संसाधन के इस्तेमाल पर जोर दिया।
हमारी यात्रा में खास रोचक बात यह रही कि जब दुकानदारों को जानकारी होती थी कि हम दोनों नर्मदा परिक्रमा कर रहे हैं तो हमारे अनुग्रह करने के बावजूद भोजन व नाश्ते के पैसे नहीं लेते थे। 23 दिन की यात्रा में प्रतिदिन दोपहर और रात्रि की भोजन प्रसादी आश्रमों में ही ग्रहण की। रास्ते में मिलने वाले आश्रमों में ही हम जमीन पर सोएं रात्रि विश्राम किया। प्रतिदिन सुबह 5 बजे मां नर्मदा में स्नान किया। हम हर दिन लगभग 120 किमी साइकिल चलाते थे।
आप दोनों को यात्रा पूर्ण होने पर मन कुछ उदासी थी , क्योंकि प्रतिदिन सुबह शाम मां नर्मदा के तट पर नहाना, आश्रम में भोजन प्रसादी करना, और थक के गहरी नींद सोना, जाने फिर कब ये नसीब होगा।
आखिर में बांद्रा भान घाट पर मा नर्मदा में स्नान कर माँ का धन्यवाद किया और शीघ्र ओंकारेश्वर पहुँच कर जल चड़ाने का संकल्प लिया है क्योंकि माँ नर्मदा परिक्रमा की पूर्णता ओंकारेश्वर में जल अर्पित करने के बाद ही मानी जाती है ।

