सोनभद्र,। ग्रामीण परिवारों को रोजगार और आजीविका की बेहतर सुरक्षा देने के साथ ग्राम पंचायतों को विकास की प्रक्रिया में अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से पंच सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में पंचायत प्रतिनिधियों को ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबीजी राम जी’ योजना के प्रावधानों की विस्तार से जानकारी देकर जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष राधिका पटेल, मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी, म्योरपुर ब्लॉक प्रमुख मान सिंह गोंड, वीबीजी राम जी अधिकारी रविन्द्र वीर सिंह, ग्राम प्रधानों सहित बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे।
125 दिन रोजगार की गारंटी, देरी पर मिलेगा मुआवजा
सम्मेलन में बताया गया कि योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को रोजगार की गारंटी 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किए जाने का प्रावधान है। काम मांगने के बावजूद निर्धारित अवधि में रोजगार नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने की व्यवस्था होगी। वहीं मजदूरी भुगतान में देरी होने पर प्रत्येक विलंबित दिन के लिए मजदूरी के साथ मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है।
ग्राम सभा तय करेगी विकास की प्राथमिकताएं
जिला पंचायत अध्यक्ष राधिका पटेल ने कहा कि गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका अहम है। पंचायत प्रतिनिधि योजना को समझकर प्रत्येक पात्र परिवार तक इसकी जानकारी पहुंचाएं। ग्राम सभा के माध्यम से स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।
60 दिन कृषि कार्यों के लिए रहेंगे सुरक्षित
सीडीओ जागृति अवस्थी ने कहा कि योजना ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ योजना लागू कराने में सहयोग की अपील की। सम्मेलन में बताया गया कि बुवाई और कटाई जैसे प्रमुख कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए कुल 60 दिनों की अवधि में योजना के तहत कार्यों का संचालन नहीं होगा, ताकि खेती-किसानी प्रभावित न हो।
जल संरक्षण और आजीविका संवर्धन को प्राथमिकता
नई व्यवस्था में ग्राम सभाओं की भूमिका बढ़ाई गई है। ग्रामीणों की सहभागिता से ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ तैयार की जाएगी। इसमें जल संरक्षण एवं सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन तथा जलवायु एवं प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी चुनौतियों से निपटने वाले कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रशासनिक मद की सीमा 6 से बढ़कर 9 प्रतिशत
योजना के प्रभावी संचालन के लिए प्रशासनिक मद की सीमा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किए जाने का प्रावधान बताया गया। इससे ग्राम रोजगार सहायकों, फील्ड असिस्टेंट और तकनीकी सहायकों की सेवाओं, प्रशिक्षण और योजना संचालन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
सम्मेलन में स्पष्ट किया गया कि मनरेगा के तहत वर्तमान में संचालित कार्य प्रभावित या बंद नहीं होंगे। मौजूदा कार्य पूर्व की तरह पूरे किए जाएंगे तथा नए प्रावधान लागू होने के बाद नियमानुसार नए कार्य शुरू किए जाएंगे। पंचायत प्रतिनिधियों से गांवों में पोस्टर, होर्डिंग और पंपलेट के माध्यम से योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कर पात्र परिवारों को इसका लाभ दिलाने का आह्वान किया गया।

