सोनभद्र। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार और माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष के आदेश पर शनिवार को सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व सिविल जज (सी.डी.) राहुल ने जिला कारागार का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बंदियों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया और जेल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
कानूनी सहायता और अपील पर जोर
निरीक्षण के दौरान सचिव ने सिद्धदोष (दोषी ठहराए गए) बंदियों से एक-एक कर उनकी सजा के विरुद्ध अपील की स्थिति जानी। उन्होंने बताया कि जो बंदी निजी अधिवक्ता करने में असमर्थ हैं, वे जेल अधीक्षक के माध्यम से निःशुल्क कानूनी सहायता प्राप्त कर अपनी अपील योजित कर सकते हैं। विचाराधीन बंदियों से उनके मुकदमों की प्रगति और जमानत के संबंध में जानकारी ली गई। नालसा (NALSA) द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और उनके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
जेल परिसर की व्यवस्थाओं का जायजा
सचिव राहुल ने जेल के भीतर पाकशाला (रसोई), पाठशाला, चिकित्सालय, लीगल एड क्लीनिक और नवनिर्मित महिला व पुरुष बैरकों का गहन निरीक्षण किया। उन्होंने विशेष रूप से *बढ़ती गर्मी से बचाव के इंतजामों और साफ-सफाई को देखा। बंदियों से उनके खान-पान और स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में भी पूछताछ की गई, जिस पर किसी बंदी ने कोई बड़ी शिकायत दर्ज नहीं कराई।
अधिकारियों को दिए कड़े निर्देश
निरीक्षण के दौरान उपस्थित जेल अधीक्षक अरुण कुमार मिश्र और डिप्टी जेलर शशांक पटेल व गौरव कुमार को सचिव ने निर्देशित किया कि: मानसिक अस्वस्थता: यदि कोई बंदी मानसिक रूप से अस्वस्थ है, तो नियमानुसार इसकी सूचना तत्काल संबंधित न्यायालय को दी जाए। सुधार कार्य: निरीक्षण में जो छोटी-मोटी कमियां पाई गईं, उन्हें तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। आंकड़ों पर एक नजर: निरीक्षण के समय जेल में कुल 770 बंदी निरुद्ध थे, जिनमें 585 विचाराधीन* और 185 सिद्धदोष बंदी शामिल हैं।

