सोनभद्र: असम के मुख्यमंत्री का पुतला फूंक कांग्रेसियों ने जताया कड़ा विरोध

सोनभद्र (रँगेश सिंह) असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर सोनभद्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। शुक्रवार को जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रामराज सिंह गोंड के नेतृत्व में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं ने राबर्ट्सगंज के बढ़ौली चौकपर विरोध प्रदर्शन किया और असम के मुख्यमंत्री का पुतला फूंका।

अभद्र टिप्पणी से आक्रोशित हैं कार्यकर्ता

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के खिलाफ अत्यंत अमर्यादित भाषा और गाली-गलौज का प्रयोग किया है। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ बताते हुए कहा कि सत्ता के नशे में चूर भाजपा नेता अपनी मर्यादा भूल चुके हैं।

जमकर हुई नारेबाजी

बढ़ौली चौक पर एकत्रित हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने असम के मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान जिलाध्यक्ष रामराज सिंह गोंड ने कहा। “राष्ट्रीय नेताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक मुख्यमंत्री के पद पर बैठकर इस तरह की भाषा का प्रयोग करना उनकी ओछी मानसिकता को दर्शाता है। भाजपा को अपने नेताओं को लगाम लगानी चाहिए।”

प्रमुख उपस्थिति इस विरोध प्रदर्शन में जिले के कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेता, पूर्व शहर अध्यक्ष राजीव त्रिपाठी, पूर्व जिला उपाध्यक्ष स्वामी अरविंद सिंह, यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शशांक मिश्रा, जिला उपाध्यक्ष हाजी नूरुद्दीन खान, जिला उपाध्यक्ष बृजेश तिवारी, जिला उपाध्यक्ष कन्हैया पांडे, आरटीआई के जिलाध्यक्ष श्रीकांत मिश्रा, कोषाध्यक्ष राजबली पांडे, अमरेश देव पांडे, लल्लू राम पांडे, मृदुल मिश्रा, रोहिल मिश्रा, ओमप्रकाश रावत, दयाशंकर पांडे, आशीष सिंह, स्वतंत्र साहनी, प्रांजल श्रीवास्तव, प्रदीप कुमार चौबे, शंकर लाल भारती, विशिष्ट चौबे, ददन प्रसाद, अनीता गोंड, रोजनी खान, पंकज मिश्रा, राहुल सिंह पटेल, गुलाब तिवारी, दयाराम प्रजापति, ऋषि राज कुमार और सुनील कुमार मिश्रा सहित युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस और सेवादल के पदाधिकारी शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को अपनी भाषा की शुचिता बनाए रखनी चाहिए, अन्यथा कांग्रेस कार्यकर्ता पूरे देश में उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।

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